कानपुर को उन्नाव से जोड़ने वाले पुल का श्रेय शोभन सरकार को ही जाता है
फतेहपुर(नई सोच)।वर्ष 2004 में शोभन सरकार द्वारा कानपुर और उन्नाव के बीच एक नया पुल बनाने की मांग की जा रही थी, लेकिन सरकार ने उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया। इस पर शोभन सरकार ने भक्तों के चढ़ावे से पुल बनाने का फैसला किया। हठी शोभन सरकार ने देखते ही देखते कई ट्रक बिल्डिंग मटीरियल खरीद लिया गया। जब यह बात शासन तक पहुंची तो सरकार ने पुल बनवाने की घोषणा की। बाद में शोभन सरकार ने पास ही स्थित प्रसिद्ध देवी स्थल चंद्रिकादेवी का उस राशि से जीर्णोद्धार कराया और वहां एक नया आश्रम भी स्थापित किया ।
एक हजार टन सोने के खजाने के स्वप्न पर खुदाई से हुई थी सरकार की फजीहत
✔वर्ष 2013 मे संत शोभन सरकार ने दावा किया था कि उन्हें सपने में फतेहपुर के रीवा नरेश के किले में शिव चबूतरे के पास 1000 टन सोने के दबे होने का पता चला है। इसके बाद ही साधु शोभन सरकार ने सरकार से सोना निकलवाने की बात कही थी।स्थिति तब हास्यास्पद हो गई जब सरकार ने उनके स्वप्न को सच मानते हुए खजाने को खोजने के लिए खुदाई भी शुरू करवा दी।हालांकि कई दिनों तक चली खुदाई के बाद भी खजाना नहीं मिला था।
✔बता दें एक साधु के सपने के आधार पर खजाने की खोज पर केंद्र व प्रदेश सरकार की खूब किरकिरी भी हुई थी। तत्कालीन विहिप के नेता अशोक सिंघल ने कहा था कि सिर्फ एक साधु के सपने के आधार पर खुदाई करना सही नहीं है।वहीं, खजाने के कई दावेदार भी सामने आ गए थे।रजा के वंशज ने भी उन्नाव में डेरा जमा दिया था।वहीँ ग्रामीणों ने भी उस पर दावा किया था।जिसके बाद तत्कालीन केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया था कि खजाने पर सिर्फ देशवासियों का हक़ होगा।उधर तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने कहा था कि खजाने से निकली संपत्ति पर राज्य सरकार का हक होगा।
✔गौरतलब है कि यह सोने का खजाना ढौंडियाखेडा स्टेट के पच्चीसवें शासक राजा राव राम बक्श सिंह के किले के अवशेष में दबा बताया गया था। जिन्होंने 1857 के दौरान ब्रिटिश शासनकाल के साथ लड़कर उसके छक्के छुड़ा दिये थे और बाद में उन्हें एक पेड़ से लटका कर फांसी दे दी गयी थी।
आलोक गौड नई सोच समाचार
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