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Tuesday, May 12, 2020

उन्नाव में 1000 टन सोने के खजाने का दावा करने वाले संत शोभन सरकार का निधन,भक्तों में शोक

ड़ौडियाखेड़ा मे एक हजार टन सोने के रहस्य का दावा करने वाले संत शोभन सरकार पंचतत्व में विलीन

👉जनपद के दूधीकगार में है संत शोभन सरकार के गुरु सत्संगानंद का आश्रम

👉10 साल की उम्र मे छोड दिया था घर,मानव कल्याण के लिये किया कार्य

👉दूधिकगार मे रहा आना जाना,खबर मिलते ही भक्तो मे शोक की लहर

आलोक गौड
नई सोच समाचार
फतेहपुर।उन्नाव के ड़ौडिया खेड़ा में स्वप्न में एक हजार टन सोना छुपे होने का रहस्य का दावा करने वाले संत शोभन सरकार पंचतत्व में विलीन हो गए। ब्रह्मुहूर्त में उनका परलोक सिधार जाने की खबर लोगों को जानकारी हुई तो उनके भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई। संत शोभन सरकार सहज रूप से ऐसे संत थे जिन्होंने मानव कल्याण के लिए बहुत सारे कार्य किए हैं। 

देश-विदेश में वह चर्चित तब हो गए जब उन्होंने उन्नाव जनपद के बीघापुर तहसील के अंतर्गत ड़ौडीयाखेडा मे सोना गडा होने का दावा किया।बताया कि यहां राजाराम राव बख्श स्थली में टनो सोना छुपा है।

कानपुर जिले के मैथा ब्लॉक के शकुलनपुरवा में शोभन सरकार का जन्म हुआ। वह मंधना के बीपीएमजी इंटर कालेज में पढ़ते थे। लोग बताते हैं स्कूल में वह खाली समय में पेड़ के नीचे बैठकर गीता या रामचरित मानस पढ़ते थे। हाईस्कूल के लगभग दस साल बाद बाबा ने घर छोड़ दिया।
किशोरावस्था में गुरु स्वामी सत्संगानंद जी की शरण में आ गए आश्रम से जुड़े लोग बताते हैं कि स्वामी नई सोच सत्संगानंद जी बड़े स्वामी के नाम से भी जाने जाते थे। शोभन सरकार ने आठ वर्ष लगातार उनके सानिध्य में तप किया बड़े स्वामी सहिमलपुर गांव ब्लॉक अमौली बिन्दकी फतेहपुर से 70 वर्ष पूर्व फतेहपुर जिले के मलवा ब्लाक के दूधीकगार जंगल में आए। वृक्ष के नीचे तपस्या की। बाद में छोटी कुटी बनाई। 

मवईया बिन्दकी के स्वामी परमानंद की बड़े स्वामी से निकटता थी। शोभन सरकार उन्हें भी गुरु का दर्जा देते थे। शोभन सरकार ने कानपुर के चौबेपुर के सुनौढम, सिंहपुर, मैथा, सरसौल के आगे दूधी घाट में मंदिरों का विकास कराया। बीच में विवाद होने पर उन्होंने मंदिर का सर्वराकार नियुक्त कर आश्रम की रजिस्ट्री तक कर दी। उन्नाव के बक्सर, फतेहपुर के दूधी कगार में भीं आश्रम बनाया था जहा आज मेला लगता है।

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10 साल की उम्र में छोड़ दिया घर

फतेहपुर।बाबा के भक्तों की मानें तो महज 10 साल की उम्र में ही सरकार ने अपना घर छोड़ दिया था। वो उन्नाव के पास बक्सर इलाके में स्वामी सत्संगानंद जी के पास चले आए। ये इलाका डौडियाखेड़ा से महज 15 किलोमीटर दूर है। यहां स्वामी सत्संगानंद के बहुत से शिष्य शिक्षा दीक्षा लेते थे।स्वामी संत्संगानंद दीक्षा देने के बाद अपने सभी शिष्यों का मुंडन कराते थे, लेकिन उन्होंने संत शोभन का मुंडन नहीं कराया।