*आज का विचार*
नई सोच
गुणवज्जनसंसर्गात्याति स्वल्पोऽपि गौरवम्।
पुष्पमालानुषङ्गेण सूत्रं शिरसि धार्यते॥
भावार्थ-गुणवान् मनुष्य के संपर्क मे रहकर सामान्य मनुष्य भी गौरव प्राप्त करता है। जैसे की फूलों के हार मे रहकर धागा भी मस्तक के उपर स्थान प्राप्त करता है।