सामाजिक दूरी नही अपनाएगे तो अपनो से दूर हो जायेगे:आलोक गौड
चौडगरा/फतेहपुर5मई।कोरोना काल मे लोग सुरक्षित रहे इसके लिये लाकडाऊन चल रहा है।ऐसे मे प्रशासन के साथ ही समाजसेवी भी लाकडाउन के नियमो का पालन और समाजिक दूरी बनाये रखने की अपील कर रहे है।नौजवानो मे साहस फूकने वाले युवा विकास समिति के जिला प्रवक्ता आलोक गौड ने कहा है की मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है लेकिन यह विडंबना ही है कि इस समय सामाजिक प्राणी को सामाजिक दूरी बनानी बनानी पड़ रही है।यह इस वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है।कोरोना वायरस की महामारी जिस तरह तेजी से पूरी दुनिया में फैली है उसको देखते हुए हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह सोशल डिस्टेंसिंग बना कर रखे।यदि आप चीन, इटली, स्पेन, अमेरिका जैसे देशों के आंकड़ों पर गौर करेंगे तो उससे साफ हो जाता है कि जितना ज्यादा जनसंख्या घनत्व किसी क्षेत्र को होगा, वहां कोरोना वायरस के फैलने की आशंका उतनी ज्यादा होगी। भारत जैसे दुनिया के दूसरे सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में इसीलिए सोशल डिस्टेंसिंग बहुत जरूरी है।दुनियाभर के डॉक्टर और वैज्ञानिक कोरोना वायरस का इलाज ढूँढ़ने में लगे हुए हैं लेकिन फिलहाल इसका जो इलाज उपलब्ध है वह है सोशल डिस्टेंसिंग। यही कारण है कि प्रधानमंत्री जी ने लॉकडाउन की घोषणा की और आजाद भारत के इतिहास में पहली बार रेल सेवाएं, हवाई सेवाएं, बस, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन की सेवाएं स्थगित हैं ताकि लोग एक दूसरे के संपर्क में नहीं आ सकें। यही नहीं भारत के पौराणिक इतिहास को भी उठाकर देखेंगे कि जो प्राचीन मंदिर कभी बंद नहीं हुए वह भी आज श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं और देशभर में सभी प्रकार के सामाजिक, धार्मिक आयोजन रद्द हैं। जब यह वायरस इतना खतरनाक है तो आप सोचिये कि यह सोशल डिस्टेंसिंग कितनी जरूरी है।सोशल डिस्टेंसिंग लोगो के लिए नयी बात है। जैसे समाज और देश के काम आना किसी भी नागरिक की जिम्मेदारी होती है उसी तरह इस कठिन समय में समाज से दूरी बनाकर भी आप देश सेवा कर सकते हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग का नियम खुद उन पर भी लागू है और इस समय यही सबसे बड़ी समाज सेवा है।
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