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Wednesday, July 22, 2020

धान की फसल🌾 को बारिश⛈️ से मिली संजीवनी तो किसान👳 हुये खुश😊


नई सोच समाचार । आलोक गौड़।✍️
फतेहपुर। बुधवार को दिनभर हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे मौसम में ठंडक पैदा होने के साथ ही मौसम सुहावना हो गया। बरसात के कारण किसानों के चेहरे खिल उठे। इस बरसात से निश्चित ही धान की खेती को लाभ मिलेगा।मौसम अब किसानों पर मेहरबान होने लगा है। मंगलवार देर रात और बुधवार शाम झमाझम बारिश होने से धान की फसल को संजीवनी मिल गई है। 
मलवां विकास खण्ड क्षेत्र के जलाला, चौडगरा, पहुर, रामपुर, मौहार, साई, अलीपुर आदि तमाम गावो मे बुद्धवार शाम मौसम सुहावना हो गया और झमाझमा बारिश हुई।धान की फसल को इस बारिश से संजीवनी मिल गई है।बारिश न होने और तेज धूप से धान की फसल झुलसने लगी थी। पिछले दो-तीन दिनों से आसमान में बादल छाए रहने से फसल के अनुकूल मौसम हो गया है, जिससे किसानों को राहत मिली है।
इस बार मानसून ने समय से दस्तक तो दे दी, लेकिन किसानों के लिए बारिश के लिए तरसा दिया। 22 जून को जनपद में मानसून की पहली बारिश होने के साथ ही किसानों को अच्छे मानसून की उम्मीद जाग गई। उन्होंने धान की रोपाई शुरू कर दी। तमाम किसान दोबारा बारिश होने के इंतजार में रोपाई नहीं कर सके। ऐसे में उन्हें ट्यूबवैल से खेतों में पानी भरने के बाद रोपाई करनी पड़ी। मगर तापमान बढ़ने लगा। फसल को अनुकूल मौसम नहीं मिला। ऐसे में धान की फसल झुलसने लगी। इसको लेकर किसान बारिश का बेसब्री से इंतजार करने लगे।मंगलवार को देर रात झमाझम बारिश होने से धान उत्पादक किसानों को कुछ राहत मिली। बुद्धवार को आसमान में बादल छाने के साथ ही कुछ देर के लिए जोरदार बारिश हुई। इससे मौसम ठंडा होने से धान की फसल के अनुकूल हो गया है।

Sunday, May 24, 2020

.......भूख से उसका दम ये निकल जायेगा,काव्य पाठ कर किया मंत्रमुग्ध (आलोक गौड़ की खबर)

जिस वतन का नमक रोज खाते हो तुम,ठगी इस कदर मत करो....
.......भूख से उसका दम ये निकल जायेगा
युवा कवि ने लाईव काव्य पाठ कर किया मंत्रमुग्ध
आलोक गौड 
नई सोच
फतेहपुर।लॉकडाउन के कारण सामाजिक ही नहीं साहित्यिक गतिविधियों पर भी पूर्ण विराम लग गया है।प्रतिबंधों के कारण कोई भी साहित्यिक गोष्ठी,कवि सम्मेलन, विमोचन आदि कार्यक्रम नहीं हो पा रहे हैं।साहित्य जगत सुप्त प्रायः हो गया था,परंतु नवीनतम तकनीक ने लेखकों,कवियों,साहित्यकारों को कुछ हद तक राहत प्रदान की है।अब वाट्सएप ग्रुप,फेसबुक, जूम,वेबिनार के माध्यम से साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है,जिससे सभी साहित्यकार एक दूसरे से लगातार जुड़े हुए है,बल्कि नई-नई रचनाओं का नित सृजन हो रहा है। सभी की सक्रियता लगातार बनी हुई है।फेसबुक पेज अमौली फ्रेंड्स क्लब द्वारा इन दिनो शाम पाच बजे प्रतिदिन अलग अलग कवियो को प्रस्तुत किया जा रहा है जो अपनी रचनाओ से आनलाइन काव्य पाठ कर लोगो के मन मे शांती पहुचा रहे है।रविवार शाम हसवा ब्लाक के मटिहा गाव निवासी युवा श्रंगार कवि डा.विकास चौरसिया पेज पर लाईव थे उन्होंने संकट के इस दौर मे भी वतन से ठगी करने वालो पर कटाक्ष किया और पढा देश को ऐसे तुम दरबदर मत करो,शुद्ध वातावरण को जहर मत करो,जिस वतन का नमक रोज खाते हो तुम,उस वतन से ठगी इस कदर मत करो।आगे उन्होने शहर से गाव जा रहे प्रवासी मजदूरो की हालत को बया किया और उन्होने सुनाया जब शहर से निकलकर वो घर जायेगा,वो गरीबी से तब कुछ सम्भल पायेगा,वो मरे न मरे इस कोरोना से पर,भूख से उसका दम ये निकल जायेगा।ऐसी ही तमाम काव्य रचनाओ को विकास ने एक घंटे तक जारी रखा।और अंत मे श्रंगार रस की कविताओ से मंत्र मुग्धकर दिया।

Saturday, May 16, 2020

कोरोना योद्धा:वित्तीय जरूरतो को पूरा कर अग्रणी भूमिका निभा रहा बैंक


👉ग्राहको की सुरक्षा का रखा जा रहा ख्याल

👉शुचितापूर्ण कार्य से ग्राहको मे खुशी,शाखा प्रबंधक को श्रेय

आलोक गौड
नई सोच समाचार
फतेहपुर16मई 2020।कोविड19के इस विपत्ति समय में स्वास्थ्य कर्मियों के अलावा भी अनेक योद्धा हमारी दिनचर्या को सरल और सामान्य बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।बैंकर्स भी उन्हीं में से एक हैं,लेकिन उनके योगदान की चर्चा न तो सरकार कर रही है और न ही आम आदमी।यह निश्चित रूप से दुखद स्थिति है।आज जरूरत इस लड़ाई में शामिल सभी लोगों की हौसला अफजाई करने की है।कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच भी सैकड़ों ग्राहक रोज बैंक आ रहे हैं। कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में बैंक शाखाओं में सामान्य परिस्थिति वाले दिनों की तरह ग्राहकों की रोज भीड़ जुट रही है।नकदी की लेनदेन, पासबुक अपडेट कराने के आलावा वे अपने अन्य वित्तीय जरूरतों को पूरा कर रहे हैं।कोई ग्राहक कोरोना से संक्रमित नहीं हो इसके लिए बैंक शाखाओं में सैनिटाइजर्स का इंतजाम किया गया है।मलवा ब्लाक के शाहजहापुर की बड़ौदा ग्रामीण बैक की शाखा के कर्मचारी इस समय बेहतर कार्य कर दैनिक जीवन मे वित्तीय जरूरतो को पूरा कर रहे है।
शाखा प्रबंधक योगेश चंद्र त्रिपाठी कहते है प्रत्येक ग्राहक के साथ सामान्य व्यवहार के साथ ऊनका कार्य किया जा रहा।शाखा के कुल सात कर्मचारी ग्राहको की सुरक्षा के लिये उन्हे दूरी बनाये रखने व सैनेटाइजर उपयोग करने की सलाह भी देते है।
शाखा प्रबंधक के कुशल नेत्रत्व मे बैंक से जुडे दस क्षेत्रीय ग्राम पंचायतो का भी कार्य हो रहा है।बैंक शाखा में साफ-सफाई का ध्यान भी रखा जा रहा है। ग्राहकों को एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने के लिए भी कहा जा रहा है।युवा विकास समिति के जिला प्रवक्ता आलोक गौड कहते है बैंककर्मी कोरोना के खतरे को जानने के बावजूद भी अपनी सेवा दे रहे हैं। इसलिए हमें उनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। इनके साथ ही हमें स्वास्थ्य कर्मियों, सफाई कर्मियों, दूरसंचार क्षेत्र में काम करने वालों, पुलिस, प्रशासन, बिजली एवं जल आपूर्ति को सुनिश्चित करने वाले कर्मियों आदि का भी शुक्रिया अदा करना चाहिए,जो अपनी जान जोखिम में डालकर हमारी सेवा में दिन-रात लगे हैं।

Thursday, May 14, 2020

पहल:युवा विकास समिति ने जिला अस्पताल मे लगवाया सैनेटाइजर चैंबर

जिला अस्पताल के अंदर जाने से पहले हो जायेगे कीटाणुरहित

पहल:युवा विकास समिति ने लगवाया सैनेटाइजर चैंबर

कम लागत मे बड़ा काम,20 सेकेड़ मे होगे सैनेटाइज
आलोक गौड नई सोच समाचार 
फतेहपुर।जिला अस्पताल के मुख्य आपातकालीन द्वार से गुजरते हुए सैनिटाइजर की बौछार होगी और वह आपके पूरे शरीर को सैनिटाइज कर देगी जिससे आप कीटाणु रहित होकर के जिला अस्पताल में अंदर जा सकेंगे युवा विकास समिति के युवाओं ने पहल कर कम लागत में सैनिटाइजर चेंबर बनाया है जिसको जिला अस्पताल के आपातकालीन द्वार में गुरुवार को लगा करके इसका श्रीगणेश कर दिया गया प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि संकट के समय में भी दुकानें बंद होने पर महीनों के अथक प्रयास से सैनिटाइजर चेंबर को तैयार किया है जिससे लोगों को सहूलियत मिल सके गुरुवार को इसे जिला अस्पताल में लगाकर जनता के लिए समर्पित कर दिया गया।मुख्य चिकित्साधिकारी उमाकांत पाण्डेय ने इसका शुभारंभ किया।

दस हजार मे बना सैनेटाइजर चैंबर

समिति की पहल पर सैनेटाइजर चैंबर बनाने मे कुल लागत दस हजार आई है जो बजारो मे तीन गुना अधिक है।लोहे के चार बाई चार एवं आठ बाई आठ के एंगल से इसे इस तरह तैयार किया गया है की लोग घरो के दरवाजे मे भी इसे फिट कर सकते है।लाकडाऊन के कारण दुकाने बंद होने पर नोजर न मिलने पर पिचकारी के नोजर का उपयोग किया गया।एक बल्ब लगा है जो रात मे रोश्नी करेगा।बीप(आवाज)होते ही पता चलेगा की चैंबर मशीन ने काम करना शुरु कर दिया है।

मानो गंगा नहा लिया हो...
सैनेटाइजर चैंबर को बनाने मे योगदान करने वाले मुकेश कुमार,संजय दत्त दिवेदी,अमित तिवारी,कंचन मिश्रा ने जिला अस्पताल मे खुद सैनेटाइज होकर दिखाया तो उपस्थित लोगो ने भी ऐसा ही किया और कहा ऐसा लगा मानो जैसे गंगा नहा लिया हो....।

20 सेकेंड मे हो जायेगे सैनेटाइज

इस चैंबर मे एक टारफ़ से घुसना है और चैंबर के नीचे ऊचा स्थान दबते ही ऊपर नोजल से सैनेटाइजर की बौछार होगी।20 सेकेंड रुककर आगे निकल जाना है।इस समय मे अस्पताल आने वाले व्यक्ति खुद को सैनेटाइज कर सकेगे।सैनेटाइजर चैम्बर के बगल मे उपयोग होने वाले दवाओ का टैंक है उसी का ऊपर से छिडकाव होता है।

पहले ही दिन 50 लोगो ने खुद को किया सैनेटाइज 

युवा विकास समिति द्वारा जिला अस्पताल में लगाए गए सैनिटाइजर चेंबर में पहले ही दिन कुछ ही घंटों में आधा सैकड़ा लोगों ने खुद को सैनिटाइज किया और यह महसूस किया कि यह है एक अच्छी पहल है। जिससे लोगों में जागरूकता भी होगी और वह अपने आप को सुरक्षित भी महसूस कर सकेंगे।

प्रमुख रुप से जिला अध्यक्ष कंचन मिश्रा प्रदेश उपाध्यक्ष अमित तिवारी संगठन प्रमुख संजय दत्त द्विवेदी सौम्या,अभिनन्दन,मुकेश कुमार,वीरेंद्र सिंह,दिनेश तिवारी,हिमांशी अजय प्रताप,सीएमओ एवं सीएमएस महोदय उपस्थित रहे।

Tuesday, May 5, 2020

युवा विकास समिति के जिला प्रवक्ता ने की समाजिक दूरी बनाये रखने की अपील

सामाजिक दूरी नही अपनाएगे तो अपनो से दूर हो जायेगे:आलोक गौड
चौडगरा/फतेहपुर5मई।कोरोना काल मे लोग सुरक्षित रहे इसके लिये लाकडाऊन चल रहा है।ऐसे मे प्रशासन के साथ ही समाजसेवी भी लाकडाउन के नियमो का पालन और समाजिक दूरी बनाये रखने की अपील कर रहे है।नौजवानो मे साहस फूकने वाले युवा विकास समिति के जिला प्रवक्ता आलोक गौड ने कहा है की मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है लेकिन यह विडंबना ही है कि इस समय सामाजिक प्राणी को सामाजिक दूरी बनानी बनानी पड़ रही है।यह इस वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है।कोरोना वायरस की महामारी जिस तरह तेजी से पूरी दुनिया में फैली है उसको देखते हुए हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह सोशल डिस्टेंसिंग बना कर रखे।यदि आप चीन, इटली, स्पेन, अमेरिका जैसे देशों के आंकड़ों पर गौर करेंगे तो उससे साफ हो जाता है कि जितना ज्यादा जनसंख्या घनत्व किसी क्षेत्र को होगा, वहां कोरोना वायरस के फैलने की आशंका उतनी ज्यादा होगी। भारत जैसे दुनिया के दूसरे सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में इसीलिए सोशल डिस्टेंसिंग बहुत जरूरी है।दुनियाभर के डॉक्टर और वैज्ञानिक कोरोना वायरस का इलाज ढूँढ़ने में लगे हुए हैं लेकिन फिलहाल इसका जो इलाज उपलब्ध है वह है सोशल डिस्टेंसिंग। यही कारण है कि प्रधानमंत्री जी ने लॉकडाउन की घोषणा की और आजाद भारत के इतिहास में पहली बार रेल सेवाएं, हवाई सेवाएं, बस, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन की सेवाएं स्थगित हैं ताकि लोग एक दूसरे के संपर्क में नहीं आ सकें। यही नहीं भारत के पौराणिक इतिहास को भी उठाकर देखेंगे कि जो प्राचीन मंदिर कभी बंद नहीं हुए वह भी आज श्रद्धालुओं के लिए बंद हैं और देशभर में सभी प्रकार के सामाजिक, धार्मिक आयोजन रद्द हैं। जब यह वायरस इतना खतरनाक है तो आप सोचिये कि यह सोशल डिस्टेंसिंग कितनी जरूरी है।सोशल डिस्टेंसिंग लोगो के लिए नयी बात है। जैसे समाज और देश के काम आना किसी भी नागरिक की जिम्मेदारी होती है उसी तरह इस कठिन समय में समाज से दूरी बनाकर भी आप देश सेवा कर सकते हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग का नियम खुद उन पर भी लागू है और इस समय यही सबसे बड़ी समाज सेवा है।

 

शराब ठेका खोले जाने के विरोध में आया मा फाउंडेशन बंद कराए जाने की मांग

शराब ठेका बंद कराने की मांग,सौंपा ज्ञापन
आलोक गौड नई सोच
फतेहपुर।शराब ठेका खोले जाने से आहत मां फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने मंगलवार को जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपकर के शराब ठेका बंद कराए जाने की मांग किया है।लम्बे समय से शराब बन्दी की माग कर रहे मा फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष रूपम मिश्रा ने अपने साथी पदाधिकारियों के संग कलेक्ट्रेट पहुंचकर के ज्ञापन सौंपते हुए कहा पूरा भारत कोरोना महामारी से लड़ रहा है।इस संकट काल मे सरकार ने शराब ठेका खौला यह निंदनीय फैसला है।दूसरी तरफ मुस्लिम समाज का पवित्र माह रमजान चल रहा है इस स्थिति में सरकार द्वारा शराब के ठेके खोलने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण और गलत है।उन्होंने जनपद में जिलाधिकारी के कुशल नेतृत्व की सराहना भी किया है।कहा शराब की दुकानें कोरोना संक्रमण को बढ़ाने में सहयोगी ना बन जाए जिससे फतेहपुर की भी स्थिति भयावह हो जाए इसलिए फतेहपुर में शराब ठेकों को पूरी तरह बंद कराया जाए।ज्ञापन एसडीएम सदर को सौपा गया।इस मौके पर विकास सिंह,विनोद सिंह चंदेल,नागेन्द्र पासवान,राशिद बाबा,पवन साहू आदि रहे।

Thursday, January 30, 2020

आस्था के साथ मां सरस्वती का करें पूजन, हर मनोकामना होगी पूरी

photo source - internet
नई सोच, भारत। जनवरी को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। हिंदू मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का जन्म हुआ था। हिंदू धर्म में प्रचलित कथा के अनुसार बसंत पंचमी  के दिन ही ब्रह्मा जी ने मां सरस्वती की संरचना की थी। ब्रह्मा जी ने ऐसी देवी की संरचना की, जिनके चार हाथ थे। एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने देवी को वीणा बचाने के लिए, जिसके बाद संसार में मौजूद सभी चीजों में स्वर आ गया और इसी वजह से उन्होंने सरस्वती मां को वाणी की देवी का नाम दिया। इस वजह से मां सरस्वती को ज्ञान, संगीत और कला की देवी कहा जाता है। अगर आप भी मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं, तो यहां दी गई विधि को अपनाएं।


1. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने के लिए सबसे पहले सरस्वती की प्रतिमा रखें।
2. कलश स्थापित कर सबसे पहले भगवान गणेश का नाम लेकर पूजा करें।
3. सरस्वती माता की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आमचन और स्नान कराएं।
4. माता को पीले रंग के फूल अर्पित करें, फिर मां सरस्वती का पूरा श्रृंगार करें।
5. मां के चरणों पर गुलाल अर्पित करें।
6. सरस्वती मां पीले फल या फिर मौसमी फलों के साथ-साथ बूंदी चढ़ाएं।
7. माता को मालपु, और खीर का भोग लगाएं।
8. सरस्वती ज्ञान और वाणी की देवी हैं। पूजा के समय पुस्तकें या फिर वाद्ययंत्रों का भी पूजन करें।
9. कई लोग बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन हवन से करते हैं। अगर आप हवन करें तो सरस्वती माता के नाम से ओम श्री सरस्वत्यै नम: स्वहा इस मंत्र से एक सौ आठ बार जाप करें।

सरस्वती मां के वंदना मंत्र का करें जाप

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता 
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। 
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिदेर्वै: सदा वन्दिता 
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा॥ 

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं 
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम। 
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम॥

Thursday, August 22, 2019

श्री कृष्ण जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं-आलोक गौड

बंशीधर,गिरधरगोपाल,जगत के पालनहार कन्हैया के जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं ।
भगवान श्री आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करे।
-आलोक गौड

Sunday, June 23, 2019

बलिदान दिवस के रूप मे मनाया जनसंघ संस्थापक की पुण्यतिथि



आलोक गौड/नई सोच

(चौडगरा)फतेहपुर।भाजपा के पदाधिकारियों की ओर से मलवा विकास खण्ड मौहार गाव के बाबा वनविहारी आश्रम मे जनसंघ के सस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि मनाई गई। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किया गया।भाजपा नेता शिवशंकर सिंह परिहार ने कहा कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक प्रखर राष्ट्रवादी और महान शिक्षाविद् डॉ. मुखर्जी को उनके कार्यों के कारण याद किया जाता हैं।डॉ. मुखर्जी ने विषम परिस्थितियों में काम कर देशहित में अपने प्राणों की आहुति दी।जम्मू कश्मीर राज्य को अलग दर्जा दिए जाने के विरोधी रहे डॉ. मुखर्जी ने धारा 370 हटाने की वकालत भी की थी।इसलिए उनके देशहित में किए कार्यों को भुलाया नहीं जा सकता।उनके पुण्यतिथि को भाजपाइयो ने बलिदान दिवस के रूप मे मनाया।इस मौके पर उनके विचारो पर प्रकाश डाला गया।भाजयुमो मलवा उपाध्यक्ष मयंक सिंह,अजीत सैनी,मंगल सिंह,रामप्रकाश सविता,सुनील सिंह,अभिमन्यु सिंह,वीरेंद्र आदि रहे।

Saturday, June 22, 2019

वेद ऋचाओ से गूज उठा वातावरण,भक्त रहे सराबोर

हवन भंडारे के साथ सम्पन्न हुआ प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम
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रेवाडी गाव मे यज्ञ वेदी मे आहुति डालते भक्त-नई सोच
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आलोक गौड/नई सोच
फतेहपुर-विकास खण्ड मलवां के  रेवाड़ी बुजुर्ग गाव मे चल रहे नवनिर्मित मंदिर मे मूर्तियो के तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का शनिवार को हवन भंडारे के साथ समापन हो गया।गाव मे तीन दिन से चल रहे धार्मिक अनुस्ठान मे भक्तो ने अपने आप को ईश्वर की भक्ति मे ऐसा सराबोर रखा की मुख से प्रभु नाम और वातावरण मे भक्ति संगीत ही गूजता रहा।इस कार्यक्रम मे बडी सख्या मे भक्तो ने हिस्सा लिया।तथा तीन दिन भक्ति के माहौल मे अपने आप को सराबोर रखा।इटावा से आये आचार्य नर्मदा प्रसाद तिवारी ने वैदिक विधि विधान से यज्ञ वेदी मे वेद ऋचाओ से आहुतिया ड़लवाई तो चारो ओर मंत्रो की गूज से माहौल भक्तिमई हो गया।उन्होने बताया यज्ञ करने से पर्यावरण मे  विशाक्त घटको का शमन हो जाता है और पर्यावरण शुद्ध होता है।कहा इसलिए लोगो को पर्यावरण सरक्षण के लिये महत्व को समझना चाहिए।हवन पूजन के बाद महिला भक्तो ने भजन-कीर्तन कर आस्था की बयार बहाई।फिर मीठी बूदी का भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।दोपहर मे भक्तों ने आयोजित भण्डारे मे प्रसाद ग्रहण कर अपने आप को धन्य किया।इस मौके पर अजीत सैनी,संजय वर्मा,रामखेलावन वर्मा,विकास जयपाल,पंकज यादव, राजू,रविन्द्रवर्मा,संतू,सत्यप्रकाश, आदि व्यावस्था सम्भाले रहे।
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Friday, May 17, 2019

खंडहर बनती जा रही फतेहपुर जिले की ऐतिहासिक धरोहरे



लेख-आलोक गौड-नई सोच
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जनपद के कुछ ऐतिहासिक विरासते

फतेहपुर।जिले मे अतीत से जोड़ने वाले स्थल उपेक्षा व अनदेखी से खंडहर बन गुमनामी की ओर बढ़ते जा रहे हैं।विरासत की यह धरोहरें फिर से उठ खड़े होने के लिए युवा पीढि़यों की ओर निहार रही हैं।गंगा एवं यमुना नदी के दोआबा का उल्लेख वैदिक साहित्य व पुराणों में मिलता है।अंतर्वेद के नाम से जिले की पहचान है।पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिघम व चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अश्विनी कुमार की नगरी के नाम से पहचान रखने वाले असनी का उल्लेख किया है। भिटौरा ब्लाक क्षेत्र में आने वाले असनी में अब भी प्राचीन मंदिरों की खंडहर होती जा रही श्रृंखला इसके महात्म को दर्शा रहे हैं। पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस अंचल से प्राप्त अवशेष मौर्य काल से बिट्रिश काल तक के हैं, जिनमें मूर्तियां, मृदभांड व मुद्राएं मुख्य रूप से शामिल हैं।
बहुआ में काकोरा बाबा के नाम से प्रसिद्ध मंदिर के गर्भ गृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है।मंदिर दसवीं शताब्दी का माना जा रहा है।देवरा बाबा के नाम से प्रसिद्ध कोरारी के मंदिर षोडशकोणीय है। इसी तरह भिठौरा में भोरहरे बाबा के नाम का मंदिर दसवीं शताब्दी की कलाकृति को झलकाता है।तेंदुली मे मध्यकालीन शैली की धरोहरें है।रेंय में प्राचीन मूर्तियों के भग्नावशेष से जहां पौराणिक विरासत मिलती है,वहीं खजुहा में बाग बादशाही एवं मुगल शासक औरंगजेब की बारादरी इतिहास का गवाह बनी है।प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में 52 शहीदों को फांसी पर लटकाने का मूक गवाह इमली का बूढ़ा पेड़ बावनी इमली के नाम से प्रसिद्ध है जो बिंदकी से खजुहा जाने वाले मार्ग में पारादान गांव के पास स्थिति है।कुछ समय पहले पुरातत्व विभाग ने जिले के 28 स्थानों को धरोहर के रूप में चिह्नित कर बोर्ड तो लगा दिया था।लेकिन संरक्षण के लिए कोई खास प्रयास नहीं किए गए। जिला स्तर पर भी किसी ने विरासत को सहेजने की दिशा में कदम नहीं बढ़ाए हैं।नई युवा पीढी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम धरोहरों को संरक्षित कर अतीत के गौरव से नई पीढ़ी को अवगत कराएंगे।अनुकाल व अनुवाक के माध्यम से जिले के सांस्कृतिक, पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व को पिरोने वाले वरिष्ठ साहित्यकार डा. ओपी अवस्थी ने कहा कि विरासत को सहेजने की फिक्र किसी को नहीं है। सांसद, विधायक निधि सहित जिला योजना से धरोहरों के लिए कुछ न किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि धरोहर पखवारा मना स्कूली बच्चों को स्थलों का महत्व बताते हुए उन्हें भ्रमण कराया जाए। जिससे नई पीढ़ी तक अतीत के महत्व को पहुंचाया जा सके।अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं है जब विरासत का नामो-निशां ही मिट जाएगा।आज सभी स्थल उपेक्षा का शिकार है जिनकी ओर जिम्मेदार व जनपदवासी ध्यान नही देते।उपेक्षा के शिकार ये विरासते कभी गुलजार हुआ करती थी।

Saturday, May 11, 2019

गंदगी के अंबार से पटा रास्ता निकलने मे होती परेशानी

गंदगी के अंबार से पटा रास्ता  निकलने मे होती परेशानी



आलोक गौड-फतेहपुर।मलवा विकासखंड के कस्बा मलवा में आंगनबाड़ी केंद्र के बगल से जीटी रोड हाईवे को जोड़ने वाला रास्ता बदहाली का शिकार है।साफ सफाई ना होने से रास्ता पूरी तरीके से गंदगी से पटा हुआ है।जिससे लोगों को निकलने में परेशानी होती है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस रास्ते में कभी सफाई नहीं होती है। जिससे लोग यहां पर कूडा भी डाल जाते हैं,और आंगनबाड़ी केंद्र का बगल का रास्ता होने के कारण यहा से लोगो के निकलने से रास्ता गली के समान बन गया है।जिससे लोगों को निकलने में परेशानी होती है।बारिश के महीने में इस दुर्दशा ग्रस्त रास्ते से निकलना और भी जटिल हो जाता है। लोग 500 मीटर की दूरी से दूसरे रस्ते से चक्कर लगाकर के आते हैं।वहीं कई बार स्थानीय लोगों ने ग्राम प्रधान से भी शिकायत किया लेकिन इस रास्ते को पक्का कराने के लिए ग्राम प्रधान ने कभी भी कोई कवायद नहीं किया।जिससे ग्रामीणों को गंदगी से निकलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।ग्रामीण कुलदीप कुमार,महेश बाजपेई,संजय,महेन्द्र,सुनील आदि ने बताया कि यह रास्ता सीधे हाईवे से जुड़ता है और आंगनबाड़ी केंद्र से गांव के अंदर जाने का रास्ता है लेकिन इसे खड़ंजा का रूप नहीं दिया जा सका। जिससे बारिश के मौसम में निकलने में भी काफी परेशानी होती है और इस समय धूल मिट्टी कूड़ा करकट गंदगी से पटा हुआ है।

Thursday, April 11, 2019

रामनवमी और महानवमी की हार्दिक शुभकामनाएं

 आप सभी मेरे ब्लॉग पाठकों को रामनवमी और महानवमी की हार्दिक शुभकामनाएं

Tuesday, April 9, 2019

मुश्किल क्षणों में भी राम गरिमापूर्ण रहे :आचार्य




आलोक गौड-नई सोच
फतेहपुर(औंग)। विकासखंड मलवा के गोधरौली गांव के नृत्य पति साकेत बिहारी विराजमान मंदिर में चल रहे दस दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान रामचरितमानस कथा व नवाह पाठ, बधाई में आचार्यो द्वारा रामरस धार बहाई जा रही है।जिसमें कथावाचक राघवशरण जी महाराज ने कहा राम, दशरथ और कौशल्या के पुत्र थे। संस्कृत में दशरथ का अर्थ है- दस रथों का मालिक। अर्थात पांच कर्मेंद्रियों और पांच ज्ञानेंद्रियों का स्वामी। कौशल्या का अर्थ है- ‘कुशलता’। जब कोई अपनी कर्मेंद्रियों पर संयम रखते हुए अपनी ज्ञानेंद्रियों को मर्यादापूर्वक सन्मार्ग की ओर प्रेरित करता है तो उसका चित्त स्वाभाविक रूप से राम में रमने लगता है।पूजा-अर्चना की तमाम सामग्रियां उसके लिए गौण हो जाती हैं।ऐसे व्यक्ति का व्यक्तित्व इतना सहज और सरल हो जाता है कि वह जीवन में आने वाली तमाम मुश्किलों का स्थितप्रज्ञ होकर मुस्कुराते हुए सामना कर लेता है।भारतीय जनमानस में राम का महत्व इसलिए नहीं है कि उन्होंने जीवन में इतनी मुश्किलें झेलीं, बल्कि उनका महत्व इसलिए है,क्योंकि उन्होंने उन तमाम कठिनाइयों का सामना बहुत ही सहजता से किया। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भी इसलिए कहते हैं,क्योंकि अपने सबसे मुश्किल क्षणों में भी उन्होंने स्वयं को बेहद गरिमापूर्ण रखा। मंदिर के महंत सीताकांत शरण जी महाराज ने भी कथा सुनाया। इस मौके पर कथा सुनने को काफी संख्या में लोग एकत्रित रहे। कथा समापन पर आरती और प्रसाद वितरित किया गया। आचार्य धर्मेंद्र शरण, स्वामी नारदानंद, रामशंकर, शिवम आदि उपस्थित रहे।

Monday, April 8, 2019

रामविवाह की कथा सुन श्रोता हूए भाव विह्ववल

*●राम नाम को हृदय मे अंगीकार कर रहे भक्त●*
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रामविवाह की कथा सुन श्रोता हूए भाव विह्ववल
कथा सुनाते आचार्य
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गोधरौली मे बह रही रामरस भक्ती की बयार
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भक्त भजन और भगवान का अनूठा संगम
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*(आलोक गौड -नई सोच)*
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फतेहपुर।विकास खण्ड मलवा के गोधरौली के नृत्य पति साकेत विहारी ठाकुर विराजमान मंदिर मे चल रहे धार्मिक अनुष्ठान से गुजायमाँन रामनाम धुन को भक्त अपने हृदय मे अंगीकार कर रहे है।आचार्यो के मुखारविंद से रामनाम की गुंजित मधुर ध्वनी भक्तो को इस चैत्र की गर्मी मे भी शीतलता का अनुभव करा रही है।लोग दोपहर3बजे से ही कथा पंडाल मे पहुच रामनाम की धूनी रमाने के लिये अपना स्थान सुनिश्चित कर लेते है।भक्त और भजन का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है जिसे कोई भी देख के शबरी मीरा और ध्रुव द्वारा की गइ प्रभु की भक्ति को समझ सकता है।ध्वनी विस्तारक यत्रो से निकलती भजनो की मधुर ध्वनी भक्तो को अनायास कथा पंडाल मे खीच ला रही है।भक्त पूर्ण भक्ती रस मे सराबोर हो झूम रहे है,मानो त्रेता मे अयोध्या का भी यही हाल रहा होगा चारो ओर खुशहाली का महौल है।राम का जन्म हो चुका है।
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कथा के चतुर्थ दिवस आचार्य राघवशरण जी महाराज ने श्रोताओ को बताया की गाधि के पुत्र मुनि विश्वामित्र जप, यज्ञ,योग करते है और मारिच व सुबाहु जैसे राक्षसो से ड़रते है क्योकि राक्षस आकर यज्ञ मे विघ्न डालते है मुनि विचार कर अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ से उनके दोनो पुत्र राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले आते है जहा राम एक ही बाण से ताड्का का वध करते है तो वही मारिच व सुबाहु का भी वध कर मुनि के यज्ञ की रक्षा करते है।उधर मिथिला नरेश अपनी पुत्री वैदेही जानकी के विवाह के लिये स्वयंबर रचाया है जहा जो धनुष तोडगा सीता उसे वरमाला पहनायेगी।मुनि विश्वामित्र को आमंत्रित किया गया है।दोनो राजकुमार को जब यह पता चलता है तो मुनि के साथ वह भी चल देते है।आचार्य ने रामचरितमानस की चौपाई से बताया धनुष यज्ञ सूनि रघुकुल नाथा,हरषि चले मुनिवर कै साथा.. दोनों राजकुमार गुरु के साथ गौतम ऋषि के आश्रम में पहुंचते है।पत्थर की नारी देख कर गुरु जी राम को बताते है कि श्राप के कारण ऋषि पत्नी आहित्या पत्थर की हो गई है। भगवान राम ने जैसे ही अंगूठा स्पर्स कराया पत्थर की आहिल्या नारी बन गई।पूरे आश्रम में खुशी का माहौल हो जाता है। इसके बाद गंगा पार करते हुए दोनो भाई जनकपुर सुंदर निवास में पहुंच जाते है।वहा तमाम राजा जब धनुष को हिला तक नही पाते गुरु की आज्ञा पाकर राम धनुष को तोड देते है सीता मगलगीतो के बीच राम को वरमाला पहनाती है।
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वही मंहत सीताकांत शरण जी महाराज ने श्रोताओ को राम की महिमा बताया कहा राम शील,सदाचार,मंगल,मैत्री, करुणा,क्षमा,सौंदर्य और भक्ति का पर्याय हैं।भक्त सतत साधना के द्वारा अपने संस्कारों का परिशोधन कर राम के इन तमाम सद्गुणों को अंगीकार कर लेता है तो उसका चित्र इतना निर्मल और पारदर्शी हो जाता है कि उसे अपने अंतःकरण में राम के अस्तित्व का एहसास होने लगता है।कथा के बाद आरती और प्रसाद वितरित किया गया।आचार्य धर्मेंद्र शरण स्वामी नारदा नंद जी कल्लू सिंह मनीस सुनील रामशंकर मुन्नू सिंह राजाराम सिंह छोटे शुभम जुगराज किशन नारायण अंशुल सीताराम आदि उपस्थित रहे।

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Sunday, April 7, 2019

राम जन्म के हेतु अनेका....राम जन्म की कथा सुनाई

फतेहपुर।पश्चिमी सरहद से पाँच कि.मी. पुरब दिशा इलाहाबाद कानपुर हाइवे पर स्थित गोधरौली गांव में नृत्य रसिक साकेत पति  भगवान ठाकुर जी विराजमान मन्दिर में दस दिवसीय धार्मिक महोत्सव का आज तीसरा दिन है
मानव सभ्यता के समूह बनाकर रहने के परिवर्तन के साथ ही इस धार्मिक स्थल का निर्माण गाँव की सोंधी मिट्टी की भीत बनाकर गांव की लकडी से पाटकर मन्दिर का आकर दिया गया।पीढिंया बितती गयी मन्दिर में निखार आता गया !
लगभग 8 हजार वर्ग मीटर में बना यह अद्वतीय स्थल कलयुग में भी त्रेतायुग का जीवान्त नमुना है।यहाँ बारहों माह  होने वाले उत्सव अपने आप महोत्सव बन जाते हैं! अधिकतर गाँव वासी तुलसी की माला व रामरज  (पीला) वश्री( लाल) तिलक लगाते  व धारण करते हैं। बोलचाल में सीताराम यहाँ के रोम रोम में रमते हैं ।शिष्टाचार में सीताराम ही मुँख से निकलता है!चाहे चोट लगे या दर्द कराह की जगह सीताराम ही हर पीडा की दवा है।प्राणान्त के समय भी ग्राम्य जनों के मुँह से सीताराम ही निकलता है। हो भी  न क्यों ब्रम्ह बेला से ही मन्दिर की चोटी से ध्वनि विस्तारक यन्त्रों से सीता राम की स्वर लहरी प्रस्फुटित होती रहती है।मलवां विकासखंड के गोधरौली गांव में 10दिवसीय राम कथा के दूसरे दिवस सीताकांत शरण जी महाराज नेकहा विश्व में केवल हमारे देश में हीअपने देश को भारत माता के नाम से पुकारते हैं। यह संस्कृति अन्य कहीं देखने को नहीं मिलती है। हमारे देश के हर एक घर में एक गाय रख ली जाए तो गाय कम पड़ जायेंगी। गौ माता की हो रही दुर्दशा से  भी मुक्ती मिलेगी।कथाक्रम में बोलते हुए आचार्य राघव शरण ने राम जन्म की कथा पर प्रकाश डाला। मनु शतरूपा आदिमानव की कथा सुनाते हुए  कहा तपस्या करते हुए इन्होंने भगवान से स्वयं पुत्र रूप में जन्म लेने को वरदान मांगा था।उन्होंने कहा ईश्वर गर्भ से अवतार ले सकता है। पृथ्वी से आकाश से कहीं से भी अवतरित हो सकता है।लोक कल्याण के लिए जब जब धरती पर पाप बोझ पड़ता है। ईश्वर जन्म लेता है। राम, भरत, शत्रुघ्न रिपुसूदन भी इसी निमित्य से पृथ्वी पर अवतरित हुए। शाम को आरती के बाद प्रसाद वितरण हुआ। अयोध्या से पधारे धर्मेंद्र जी ने श्री राम कथा सुनायी। नागेश्वर सिंह, राजाराम सिंह, मुन्नू सिंह, कल्लू प्रजापति, ठाकुर प्रसाद, कल्लू सिंह, मनीष, सुनील, राम शंकर आदि उपस्थित रहे।

सती ने नही माना शिव की बात,शिव ने किया सती का त्याग

पति पत्नी को एक दूसरे की माननी चाहिए बात-वैदेही

 सती ने नही माना शिव की बात,शिव ने किया सती का त्याग
रामकथा सूनाती वैदेही
                       

आलोक गौड-नई सोच

बिन्दकी-फतेहपुर।विश्वास हर रिश्ते की जड़ होती है जब पति-पत्नी का एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते हैं तो वैवाहिक जीवन मे अशाती होना तय है।इसीलिए पति-पत्नी को एक दूसरे को हर बात बताना चाहिए ताकि दोनों के बीच भरोसा बना रहे।उक्त विचार गुरु रामभद्राचार्य की कृपा पात्र शिष्या चित्रकूट से आई कथावाचिका मानस चेतकी वैदेही ने कहा।बिन्दकी नगरी के रामलीला मैदान मे रामनवमी महोत्सव मेला व रामकथा शुरु है।कथा के दौरान मानस चेतकी वैदेही ने  सती प्रसंग सुनाया उन्होने बताया एक बार त्रेता जुग माहीं।संभु गए कुंभज रिषि पाहीं...एक बार शिव जी अगस्त्य ऋषि के पास गये सती भी साथ थी,ऋषि ने रामकथा विस्तार से कहा।सती को यह थोड़ा अजीब लगा कि श्रीराम शिव के आराध्य देव हैं।सती का ध्यान कथा में नहीं रहा और वह यह सोचतीं रहीं कि शिव जो तीनों लोकों के स्वामी हैं,वे श्रीराम की कथा सुनने के लिए क्यों आए हैं।

कथा समाप्त हुई और शिव-सती वापस कैलाश पर्वत लौटने लगे।उस समय रावण ने सीता का हरण किया था और श्रीराम,सीता की खोज में भटक रहे थे।सती को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि शिव जिसे अपना आराध्य देव कहते हैं,वह एक स्त्री के वियोग में साधारण इंसान की तरह रो रहा है।सती ने शिवजी के सामने ये बात कही तो शिव ने समझाया कि यह सब श्रीराम की लीला है।भ्रम में मत पड़ो, लेकिन सती नहीं मानी और शिवजी की बात पर विश्वास नहीं किया।सती ने श्रीराम की परीक्षा लेने की बात कही तो शिवजी ने रोका,लेकिन सती पर शिवजी की बात का कोई असर नहीं हुआ।सती, सीता जी का रूप धारण करके श्रीराम के सामने पहुंच गईं।श्रीराम ने सीता के रूप में सती को पहचान लिया और पूछा कि हे माता,आप अकेली इस घने जंगल में क्या कर रही हैं।शिवजी कहां हैं।जब श्रीराम ने सती को पहचान लिया तो वे डर गईं और चुपचाप शिव के पास लौट आईं।जब शिव जी ने सती से पूछा की वो कहां गई थीं तो वह कुछ जवाब ना दे सकीं, लेकिन शिव सब समझ गए थे। कि जिन श्रीराम को वे अपना आराध्य देव मानते हैं,सती ने उनकी पत्नी का रूप धारण करके उनकी परीक्षा लेकर उनका अनादर किया है।इस कारण शिवजी ने मन ही मन सती का त्याग कर दिया।सती भी ये बात समझ गईं और दक्ष के यज्ञ में जाकर आत्मदाह कर लिया।मानस चेतकी वैदेही ने कहा 

कई बार पत्नियां पति की और पति पत्नी की बात पर विश्वास नहीं करते। इसका नतीजा यह होता है कि रिश्ते में बिखराव आ जाता है।इस मौके पर आयोजक रामभक्त सेवा समिति के अध्यक्ष ओमजी हिन्दू, रतन टाटा,सौरभ गुप्ता,सोम,मंगलम ओमर,अनमोल राजा अंकित,वेद प्रकाश,अभिसेक,रौनक ओमर अन्नू गुप्ता,बरातीलाल निषाद आदि रहे।

Friday, April 5, 2019

राम कथा के माध्यम से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध गोधरौली के नित्य पति ठाकुरद्वारा मंदिर में शुरू हुई कथा

आलोक गौड फतेहपुर

औंग/फतेहपुर: मलवां विकासखंड के गोधरौली गांव के श्री नृत्य रसिक साकेत पति विराजमान ठाकुर द्वारा मंदिर में शुक्रवार को रामकथा शुरु हुई।जिसमे प्रतिदिन राम कथा एवं रामचरितमानस पाठ नवाह पाठ होगा व बधाई महोत्सव मनाया जायेगा।पूज्य महंत श्री सीताकांत शरण जी महाराज व आचार्य राघव शरण जी महाराज व आचार्य धर्मेंद्र जी महाराज के देखरेख में होगा।श्री राम कथा में प्रथम दिवस शुक्रवार को रामनाम महिमा का व्याख्यान करते हूए महंत सीताकांत शरण जी महाराज ने कहा  भगवान के नाम,चरित्रों का स्मरण, श्रवण करके उनके गुण, यश का कीर्तन, अर्चन, प्रणाम करना, अपने को भगवान का दास समझना, उनको सखा मानना तथा भगवान के चरणों में सर्वश्व समर्पण करके अपने अंत:करण में प्रेम पूर्वक अनुसंधान करना ही भक्ति है।नाम की महिमा ऐसी है की सारे विकारो का विनाश हो जाता है।वहीं श्रोताओं को कथा सुनाते हुए आचार्य राघव शरण जी महाराज ने कहा श्रीराम केवल हिन्दुओं के ही “राम” नही हैं, बल्कि वे अखिल विश्व के प्राणाराम हैं।सारे ब्रह्माण्ड में चराचर रुप से नित्य रमण करने वाले, सर्वव्यापी श्रीराम किसी एक देश या व्यक्ति की वस्तु कैसे हो सकते हैं। वे तो सबके हैं, सबमें हैं, सबके साथ सदा संयुक्त हैं और सर्वमय हैं। कोई भी जीव उनके उत्तम चरित्र का गान करता है, श्रवण करता है,अनुसरण करता है, निश्चय ही पवित्र होकर परम सुख की प्राप्ति करता है।गोस्वामी तुलसीदासजी ने लिखा है राज्याभिषेक की बात सुनकर न तो राम को प्रसन्नता होती है और न ही वनवास की सूचना पर दुःख का अनुभव करते हैं। मां कौशल्या श्री रामजी से कहती हैं “तात जाउं बलि वेगि नहाहू, जो मन भाव मधुर कछु खाहू। पितु समीप तब जाएहु भैया, भै बड़ि बार जाइ बलि मैया। इस मौके पर प्रथम दिवस कथा सुनने को काफी संख्या में लोग एकत्रित हुए।जिसमें प्रमुख रूप से यजमान देवा,सीताराम सिंह चौहान,शिवम,जग्गनाथ पाडेय आदि उपस्थित रहे। 

            फतेहपुर। मलवां विकासखंड के गोधरौली गांव में नृत्य रासिकपति भगवान विराजमान मंदिर में 10दिन तक  भगवान राम जन्म उत्सव का कार्यक्रम का आयोजन 5 अप्रैल से लेकर 14तक अनवरत जारी रहेगा। नित्य प्रतिदिन 8:00 से 9:00 बजे प्रातः पूजन 9:00 बजे से 12:00 बजे तक रामायण का नवाहपाठ 3:00 बजे से 6:30 बजे तक आचार्यों द्वारा राम कथा होगी।   इस कार्यक्रम में 10दिन तक शाम को प्रसाद वितरण होगा । पूजन कार्यक्रम अलग-अलग यजमानों द्वारा आयोजित किया जाएगा ।रात्रि 8:00 बजे से 9:30 बजे तक राम जन्म बधाई होगी।राम कथा व्यास आचार्य राघव शरण अयोध्या से पधारे धर्मेंद्र शरण एवं नित्य रसिक पति विराजमान मंदिर के महंत स्वामी सीताकांत शरण जी महाराज द्वारा संपन्न होगी। इस कार्यक्रम में कानपुर ,जालौन, अयोध्या ,मिथिला ,बिहार, चित्रकूट के भक्त एवं संत पधार कर अपनी गरिमामई उपस्थिति दर्ज कराएंगे गोधरौली गांव में यह अनूठा कार्यक्रम रामतीर्थ नेपाल मिथिला, अयोध्या, चित्रकूट के बाद इस गोधरौली गांव के मंदिर में अद्भुत रूप में देखने को मिलता है ।यहां पर  मिथिला और अयोध्या की झांकी देखकर त्रेता युग साकार हो जाता है ।प्रथम दिवस व्यासपीठ से बोलते हुए ठाकुर जी मंदिर के महंत सीताकांत शरण जी महाराज ने कहा राम कथा मानव समाज को सही रास्ता दिखाती है। राम कथा मैं समाज की बुराइयों, व्यसनों से छुटकारा पाने का ज्ञान मिलता है। नित्य प्रति राम कथा के पाठ से समाज की बुराइयों से मुक्ति पाई जा सकती है। नित्य रामायण के पाठ से नशे का आदी व्यक्ति भी छुटकारा पा सकता है। राम कथा सत्संग रूपी सरिता है। राम कथा में जानकी को जगत माता के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। कथा समापन के बाद आरती संपन्न हुई। प्रसाद वितरण भी किया गया। देवा महाराज, अंजुल ,शिवम जुगराज ,सीताराम ,किशन नारायण, छोटे ,शुभम ,राम शंकर आदि उपस्थित रहे।   

13अप्रैल तक कथा प्रतिदिन 3:00 बजे से 6:00 बजे तक चलेगी।

गौरवमयी इतिहास होने के बावजूद पिछड गया निषाद समाज

गौरवमयी इतिहास होने के बावजूद पिछड गया निषाद समाज



आलोक गौड फतेहपुर

फतेहपुर(चौडगरा)।चैत्र शुक्ल पंचमी को जन्मे #महाराजा #निषाद_राज_गुह्य ने भगवान श्री राम के वनगमन के समय मित्रता की अछ्वुत मिसाल प्रस्तुत किया था, इसका बखान रामायण सहित अन्य ग्रंथों में भी मिलता है। गौरवमयी इतिहास होने के बावजूद निषाद समाज पिछड़ गया, जिसे जागरूक व शिक्षित होने की जरूरत है।

उक्त बाते शुक्रवार को मलवा विकासखंड के  बोधिखेड़ा-भाऊपुर में  गुहराज निषादराज की जयंती मे कहा गया।निषाद राज की #जयँती धूमधाम के साथ मनाई गई।जिसमें निषाद समुदाय के लोगों ने  उनके तैलीय चित्र पर फूल माला चढ़ा कर के  उनके बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से  भाऊपुर प्रधान मनीराम निषाद शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हमारी बिरादरी काफी पिछड़ी हुई है। हमें अपने अधिकारों के लिए एकजुट होना पड़ेगा। उन्होंने आह्वान किया कि उठो, जागो और महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लो। विशिष्ट अतिथि जगदीश निसाद ने कहा कि अगर किसी को मित्रता सीखना हो तो महाराजा गुहराज निषाद से सीखें।

समूदाय के लोगो को सम्बोधित करते हूए शिक्षक शुशील कुमार निसाद ने कहा सामाजिक समरसता के सजग प्रहरी थे निषादराज गुह। समाज के सभी लोगों में खुशी लाने के लिए उन्हाेंने अपनी पूरा जीवन कुर्बान कर दिया था।उन्होंने कहा कि स्वजातीय बंधु बांधवों के साथ समूचा समाज ही उनको प्रेरणा स्रोत मानता है।

 समारोह की अध्यक्षता एडवोकेट जगदीश निषाद ने किया वही कार्यक्रम का संचालन पूर्व प्रधानाचार्य स्वयंबर सिंह ने किया इस मौके पर निषाद समुदाय के काफी संख्या में लोग एकत्रित रहे।

Sunday, March 31, 2019

वीर वही जो भेंट चढ़ा दे चढ़ती हुई जवानी को.......

वीर वही जो भेंट चढ़ा दे चढ़ती हुई जवानी को.......

 परशुराम लक्ष्मण संवाद सुन फड़क उठी भुजाएं
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आलोक गौड नई सोच

चौडगरा/फतेहपुर(ब्यूरो)।मलवा विकास खण्ड के पहरवापुर गाव मे रविवार रात रामलीला मे सीता स्वयंबर से लेकर लक्ष्मण परशूराम संवाद का सजीव मंचन किया गया जो सोमवार दोपहर तक चलता रहा।राम की भूमिका मे राज पाण्डेय ने धनुस तोड़ा तो परशुराम अभिनेता का अभिनय कर रहे भय्यन अवस्थी क्रोधित हो गये।जिसके बाद लक्ष्मण अभिनेता राहुल अवस्थी के बीच संवाद शुरु होता है।            

 रविवार रात रामलीला मे धनुष यज्ञ के आयोजन में जनक की मिथिला में देश देशांतर के लोग आते है।जिसमें राजा जनक ने धनुष तोड़ने वाले के साथ मिथिलेश कुमारी जानकी के विवाह का प्रण किया था।जिसे गुरु विश्वामित्र की अनुकम्पा से दसरथ पुत्र श्री राम धनुष को तोड़ पाते है।धनुष टूटने की ध्वनि सुनकर महेन्द्राचल पर्वत से परशुराम जी का आगमन मिथिला में होता है।जिन्हें आया देखकर स्वयंबर में भाग लेने आए राजा गण भयभीत हो जाते है।उनके क्रोध को श्री राम जी शांत करने का प्रयास करते है। तभी बीच मे लक्ष्मण जी बोल देते है। फिर परशुराम जी का क्रोध अत्यधिक हो जाता है।वह घोषणा करते है कि अब लक्ष्मण के प्राण को तिरोहित कर देंगे। अपने परशु से तब श्री राम जी उनके आगे हाथ जोड़कर विनती करते है कि आप मुझे मार दे।लेकिन भैया को नही, अपराधी मैं हूं।भाइयो का अनुपम प्रेम देखकर परशुराम जी का क्रोध शांत हो जाता और भृगु चरण हृदय धारण किये, श्री राम को पहचान जाते हैं और उनकी जय करते हुए दोबारा तप के लिए चले जाते है।

-इस मौके पर उन्होंने परशुराम लक्ष्मण संवाद के दौरान कही जाने वाले कविता रूपी संवादों को सुनाया उन्होंने एक वीर रस की कविता सुनाते हुए कहा कि-
 
वीर वही जो भेंट चढ़ा दे चढ़ती हुई जवानी को,
वीर वही जो समरांगण में भरे भाव तूफानी...जिसे सुन श्रोताओ की भूजाये फडक उठी।दर्शको ने राम लक्ष्मण के अभिनय को सराहा।इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष गुलाब सिंह,रोहित अवस्थी नरेश राजपूत मुकेश यादव सचिन सिंह भदौरिया रोहित दिवेदी आदि रहे।