सात्विक प्रसिद्धि के श्रंगार पर युवा विकास समिति के जिला प्रवक्ता आलोक गौड़ ने आज प्रातः फेसबुक पर अपने जो विचार साझा किए इसे नई सोच समाचार समूह में आप सभी लोगों के लिए पेश करते हैं बहुत ही उत्तम और प्रेरक विचार पढ़िए आनंद आएगा और अमल भी कीजिए-
शृंगार किसी भी कार्य वस्तु व्यक्ति या कृतित्व में चार चांद लगा देता है श्रृंगार से निखार आता है और निखार हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है।प्रकृति में भी जब वसंत ऋतु का आगमन होता है तो रंग-बिरंगे खूबसूरत पुष्प और पर्णो से प्रकृति का श्रंगार हो जाता है। जिस तरह बाहरी श्रृंगार की वस्तुएं हमारे चारों ओर है उसी तरह आंतरिक श्रंगार की वस्तुएं भी व्यक्ति के इर्द-गिर्द बिखरी हुई है।जो व्यक्ति बाहरी श्रंगार के बजाय आंतरिक श्रंगार को अधिक महत्व देते हैं, वे न केवल अपने पूरे जीवन को सफल बना लेते हैं आपितु अपनी छाप सदियों तक लोगों के मन मस्तिष्क में छोड़ देते हैं। आचार्य चाणक्य भी कहते हैं कि यदि व्यक्ति के पास प्रसिद्धि है तो भला उसे और किसी श्रृंगार की क्या आवश्यकता है प्रसिद्धि सदभावनाओं के साथ ग्रहण करनी चाहिए जो प्रसिद्धि कुटिलता नकारात्मकता भावनाओं के साथ अर्जित की जाती है वह क्षणिक होती है।जबकि सकारात्मक भाव से प्राप्त की गई प्रसिद्धि अमिट होती है ऐसी प्रसिद्धि की छाप युगो युगो तक लोगों के मन मस्तिष्क पर छाई रहती है। प्रसिद्धि के श्रंगार को कई बार व्यक्ति अपने श्रम और संघर्ष से प्राप्त करता है तो कई बार यह व्यक्ति के आंतरिक भागों को जागृत करने से भी बाहर आ जाती है।प्रसिद्धि के श्रृंगार को प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है इसके लिए उसे स्वयं पर विश्वास होना चाहिए।व्यक्ति के जीवन के उच्च लक्ष्य उसे प्रसिद्धी के शिखर पर पहुंचा देते हैं। और व्यक्ति साधारण व्यक्तित्व का होते हुए भी इस श्रंगार के माध्यम से सबका आदर्श और प्रिय बन जाता है।कृत्रिम श्रृंगार वक्त रहने पर धूमिल पड़ जाता है और धूल जाता है जबकि प्रसिद्धि का श्रंगार यदि ईमानदारी एवं सात्विक भावो के साथ किया जाता है तो जीवन भर धूमिल नहीं पड़ता।जो व्यक्ति प्रसिद्धि के श्रंगार को ओढ़ लेता है उसके लिए बाहरी व्यक्ति तो मोटा पतला छोटा लंबा काला गोरा कोई मायने नहीं रखता वह अपने प्राकृतिक स्वरूप से लोगों के बीच में जीवनभर दमकता रहता है इसलिए आप भी कृतिम श्रृंगार पर अधिक ध्यान देने के बजाय तन मन और सकारात्मक भाव के साथ प्रसिद्धि के श्रंगार को अपनाएं और जीवन सफल बनाएं ।
![]() |
| युवा विकास समिति के प्रवक्ता आलोक गौड़ |
शृंगार किसी भी कार्य वस्तु व्यक्ति या कृतित्व में चार चांद लगा देता है श्रृंगार से निखार आता है और निखार हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है।प्रकृति में भी जब वसंत ऋतु का आगमन होता है तो रंग-बिरंगे खूबसूरत पुष्प और पर्णो से प्रकृति का श्रंगार हो जाता है। जिस तरह बाहरी श्रृंगार की वस्तुएं हमारे चारों ओर है उसी तरह आंतरिक श्रंगार की वस्तुएं भी व्यक्ति के इर्द-गिर्द बिखरी हुई है।जो व्यक्ति बाहरी श्रंगार के बजाय आंतरिक श्रंगार को अधिक महत्व देते हैं, वे न केवल अपने पूरे जीवन को सफल बना लेते हैं आपितु अपनी छाप सदियों तक लोगों के मन मस्तिष्क में छोड़ देते हैं। आचार्य चाणक्य भी कहते हैं कि यदि व्यक्ति के पास प्रसिद्धि है तो भला उसे और किसी श्रृंगार की क्या आवश्यकता है प्रसिद्धि सदभावनाओं के साथ ग्रहण करनी चाहिए जो प्रसिद्धि कुटिलता नकारात्मकता भावनाओं के साथ अर्जित की जाती है वह क्षणिक होती है।जबकि सकारात्मक भाव से प्राप्त की गई प्रसिद्धि अमिट होती है ऐसी प्रसिद्धि की छाप युगो युगो तक लोगों के मन मस्तिष्क पर छाई रहती है। प्रसिद्धि के श्रंगार को कई बार व्यक्ति अपने श्रम और संघर्ष से प्राप्त करता है तो कई बार यह व्यक्ति के आंतरिक भागों को जागृत करने से भी बाहर आ जाती है।प्रसिद्धि के श्रृंगार को प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है इसके लिए उसे स्वयं पर विश्वास होना चाहिए।व्यक्ति के जीवन के उच्च लक्ष्य उसे प्रसिद्धी के शिखर पर पहुंचा देते हैं। और व्यक्ति साधारण व्यक्तित्व का होते हुए भी इस श्रंगार के माध्यम से सबका आदर्श और प्रिय बन जाता है।कृत्रिम श्रृंगार वक्त रहने पर धूमिल पड़ जाता है और धूल जाता है जबकि प्रसिद्धि का श्रंगार यदि ईमानदारी एवं सात्विक भावो के साथ किया जाता है तो जीवन भर धूमिल नहीं पड़ता।जो व्यक्ति प्रसिद्धि के श्रंगार को ओढ़ लेता है उसके लिए बाहरी व्यक्ति तो मोटा पतला छोटा लंबा काला गोरा कोई मायने नहीं रखता वह अपने प्राकृतिक स्वरूप से लोगों के बीच में जीवनभर दमकता रहता है इसलिए आप भी कृतिम श्रृंगार पर अधिक ध्यान देने के बजाय तन मन और सकारात्मक भाव के साथ प्रसिद्धि के श्रंगार को अपनाएं और जीवन सफल बनाएं ।

No comments:
Post a Comment