जलाला नहर कोठी की हो रही दुर्दशा फोटो1
फतेहपुर।जनपद में नहर विभाग, भारत जैसे कृषिप्रधान देश के प्रशासन में विशेष स्थान रखते हैं। सिंचाई नहरों में देश की वह अमूल्य निधि बहती है जिसके ऊपर कृषि उत्पादन बड़ी मात्रा में निर्भर करता है।नहरों के संचालन के लिए विशेष कानून बने हुए हैं, जिनके अंतर्गत नहर विभाग अपना कार्य चलाते हैं।मलवाँ विकस खण्ड के गांव जलाला में अंग्रेजी हुकूमत की बनी कोठी आज वीरान पड़ी है।युवा विकास समिति के जिला प्रवक्ता आलोक गौड़ ने जिला प्रशासन से कोठी की दरद्द्शा पर ध्यान आकृस्त किया है उन्होने शिकायत कर कोठी को ग्रीन बेल्ट के रूप मे विकसित करने की गुहार लगाया है।जलाला में अंग्रेजी हुकूमत की नहर कोठी पर किसी जमाने में अंग्रेजों के घोड़ों की टापों की आवाज सुनाई देती थी ।और यह कोठी ए क्लास की कहलाती थी। इंग्लैंड से अंग्रेजी शासन का कोई बड़ा ओहदेदार आता था, तो उसे इसी कोठी में विश्राम कराया जाता था। अंग्रेजों के जाने के बाद विभागीय अफसरों की अनदेखी के कारण क्षेत्र की यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे खण्डहर में तब्दील होती गई और आज यहां पर केवल पुरानी यादें ही बाकी बची हैं। अंग्रेजी हुकूमत में गांव से 200 मीटर की दूरी पर एनएच 46 के निकट अंग्रेजों ने कोठी का निर्माण किया था ।और इसमें अंग्रेजों का बड़ा ओहदेदार रहता था।यहीं से अंग्रेजी शासन चलाया जाता था। घोड़ों की टाप की आवाज गांव तक जाती थी। इस कोठी पर क्षेत्र के कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व देश की जंग-ए-आजादी में कूदने वाले लोगों को कोड़ों से पीटा ही नहीं गया, बल्कि उन्हें तमाम तरह की यातनाएं दी गईं।राष्ट्रीय राजमार्ग 46 के निकट बनी नहर कोठी रखरखाव के अभाव में अपने अस्तित्व को खो रही है।
शासन द्वारा नहर के किनारे बनी अन्य कोठियों का उपयोग किया जा रहा है ।जबकि यह नहर कोठी जनपद की अन्य पुलों पर बनी नहर कोठियों से आज भी बेहतर है ।अब यह कोठी अराजक तत्वों का केंद्र बन गयी हैं । निचली गंगा नहर के किनारे अग्रेजी हुकुमत में कोठियां बनायी गयी।क्षेत्रीय ग्रमीण लोगों के अनुसार यहां सेना की भर्ती भी हुआ करती थी। सही तरह से रखरखाव न होने के कारण हालत जर्जर हो चुकी है। अराजक तत्वों ने इसे अपना अड्डा बना रखा है।ब्रिटिश शासन काल में लाखों से बनवायी गयी नहर विभाग की कोठी उपेक्षा के चलते खंडहर हो गई। असामाजिक तत्व कीमती सामान भी ले गये।अंग्रेजी हुकूमत में मलवाँ विकास खण्ड के जलाला गाँव में लगभग छ:एकड भूमि पर नहर कोठी बनवायी गयी थी। इसमें अंग्रेज अफसर ठहरते थे। परिसर में आम, शीशम, जामुन, नीम, सेमर, बबूल, शहतूत, बेल, कटहल, सागौन आदि के पेड़ लगाये थे। देखरेख के अभाव में बीस वर्षो से कोठी का यह भवन बदहाली का शिकार है। आलम यह है कि मरम्मत व देखरेख के अभाव में भवन की हालत जर्जर हो गयी है। दीवारों व छतों पर दरारें पड़ गयी है। अराजक तत्व भवन में लगे कीमती खिड़कियां व दरवाजे उखाड़कर घरों को ले गये है। वर्तमान समय में इस कोठी में रहने के लिये नहर विभाग के बेलदारों के लिये सात कमरे, तार घर, जेई, सिंचाई, अमीन, अधिशासी, जिलेदार आवास सहित बीस कमरे हैं। इनमें मात्र कुछ कमरे ही अच्छी हालत में हैं।दूर दूर स्थापित इस कैम्पस मे घोडो के लिए अस्तबल भी था जो आज पूरी तरह ग़ायब है।नहर कोठी का यह हाल 1990के बाद ही हुआ।कुल मिलाकर नहर विभाग की कोठी अपनी
बदहाली के आंसू बहा रही है।उपजिलाधिकारी शुशील कुमार गौड़ ने कहा नहर कोठीयो की दुर्दशा की जानकारी विभाग ही दे सकता है,जानकारी करके जो हो सकेगा किया जायेगा।
फतेहपुर।जनपद में नहर विभाग, भारत जैसे कृषिप्रधान देश के प्रशासन में विशेष स्थान रखते हैं। सिंचाई नहरों में देश की वह अमूल्य निधि बहती है जिसके ऊपर कृषि उत्पादन बड़ी मात्रा में निर्भर करता है।नहरों के संचालन के लिए विशेष कानून बने हुए हैं, जिनके अंतर्गत नहर विभाग अपना कार्य चलाते हैं।मलवाँ विकस खण्ड के गांव जलाला में अंग्रेजी हुकूमत की बनी कोठी आज वीरान पड़ी है।युवा विकास समिति के जिला प्रवक्ता आलोक गौड़ ने जिला प्रशासन से कोठी की दरद्द्शा पर ध्यान आकृस्त किया है उन्होने शिकायत कर कोठी को ग्रीन बेल्ट के रूप मे विकसित करने की गुहार लगाया है।जलाला में अंग्रेजी हुकूमत की नहर कोठी पर किसी जमाने में अंग्रेजों के घोड़ों की टापों की आवाज सुनाई देती थी ।और यह कोठी ए क्लास की कहलाती थी। इंग्लैंड से अंग्रेजी शासन का कोई बड़ा ओहदेदार आता था, तो उसे इसी कोठी में विश्राम कराया जाता था। अंग्रेजों के जाने के बाद विभागीय अफसरों की अनदेखी के कारण क्षेत्र की यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे खण्डहर में तब्दील होती गई और आज यहां पर केवल पुरानी यादें ही बाकी बची हैं। अंग्रेजी हुकूमत में गांव से 200 मीटर की दूरी पर एनएच 46 के निकट अंग्रेजों ने कोठी का निर्माण किया था ।और इसमें अंग्रेजों का बड़ा ओहदेदार रहता था।यहीं से अंग्रेजी शासन चलाया जाता था। घोड़ों की टाप की आवाज गांव तक जाती थी। इस कोठी पर क्षेत्र के कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों व देश की जंग-ए-आजादी में कूदने वाले लोगों को कोड़ों से पीटा ही नहीं गया, बल्कि उन्हें तमाम तरह की यातनाएं दी गईं।राष्ट्रीय राजमार्ग 46 के निकट बनी नहर कोठी रखरखाव के अभाव में अपने अस्तित्व को खो रही है।
शासन द्वारा नहर के किनारे बनी अन्य कोठियों का उपयोग किया जा रहा है ।जबकि यह नहर कोठी जनपद की अन्य पुलों पर बनी नहर कोठियों से आज भी बेहतर है ।अब यह कोठी अराजक तत्वों का केंद्र बन गयी हैं । निचली गंगा नहर के किनारे अग्रेजी हुकुमत में कोठियां बनायी गयी।क्षेत्रीय ग्रमीण लोगों के अनुसार यहां सेना की भर्ती भी हुआ करती थी। सही तरह से रखरखाव न होने के कारण हालत जर्जर हो चुकी है। अराजक तत्वों ने इसे अपना अड्डा बना रखा है।ब्रिटिश शासन काल में लाखों से बनवायी गयी नहर विभाग की कोठी उपेक्षा के चलते खंडहर हो गई। असामाजिक तत्व कीमती सामान भी ले गये।अंग्रेजी हुकूमत में मलवाँ विकास खण्ड के जलाला गाँव में लगभग छ:एकड भूमि पर नहर कोठी बनवायी गयी थी। इसमें अंग्रेज अफसर ठहरते थे। परिसर में आम, शीशम, जामुन, नीम, सेमर, बबूल, शहतूत, बेल, कटहल, सागौन आदि के पेड़ लगाये थे। देखरेख के अभाव में बीस वर्षो से कोठी का यह भवन बदहाली का शिकार है। आलम यह है कि मरम्मत व देखरेख के अभाव में भवन की हालत जर्जर हो गयी है। दीवारों व छतों पर दरारें पड़ गयी है। अराजक तत्व भवन में लगे कीमती खिड़कियां व दरवाजे उखाड़कर घरों को ले गये है। वर्तमान समय में इस कोठी में रहने के लिये नहर विभाग के बेलदारों के लिये सात कमरे, तार घर, जेई, सिंचाई, अमीन, अधिशासी, जिलेदार आवास सहित बीस कमरे हैं। इनमें मात्र कुछ कमरे ही अच्छी हालत में हैं।दूर दूर स्थापित इस कैम्पस मे घोडो के लिए अस्तबल भी था जो आज पूरी तरह ग़ायब है।नहर कोठी का यह हाल 1990के बाद ही हुआ।कुल मिलाकर नहर विभाग की कोठी अपनी
बदहाली के आंसू बहा रही है।उपजिलाधिकारी शुशील कुमार गौड़ ने कहा नहर कोठीयो की दुर्दशा की जानकारी विभाग ही दे सकता है,जानकारी करके जो हो सकेगा किया जायेगा।


No comments:
Post a Comment