Friday, December 7, 2018

जंगे आजादी मे आजादी के दीवाने ने खाई थी गोली,स्मृति स्थल की गौरवगाथा

नयी सोच समाचार
फतेहपुर।देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिये देश के जाने कितने वीर सपूतों ने अपनी कुर्बानी दी थी।तब जाकर सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत देश सुख चैन की सांसे ले रहा है।जंगे आजादी में देश की आन बान शान और देश को आजाद कराने के लिए कूदने वाले ऐसे तमाम फतेहपुर जनपद के क्रांतिकारी हुए हैं जिनको आज भी लोग याद करके उस हुकूमत को कोसते हैं जिसके कारण यह देश गुलाम था,ऐसा ही एक स्मृति स्थल मलवा विकासखंड के साईं गांव में बना हुआ है,जिसमें आज भी युवाओं के लिए एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रेरक हैं जहां पर पहुंचने वाले युवा उनके स्मृति पर प्रतिमा पर फूल माला चढ़ाकर के अपने आप को गौरवान्कित समझते हैं और इस देश पर गर्व करते हैं कि ऐसे लोग भी हुए हैं जिनके कारण देश आज आजाद है।                                             

मलवा विकासखंड के साईं गांव में साधारण परिवार में जन्मे स्वर्गीय कामता प्रसाद तिवारी उर्फ राम प्रसाद का स्मारक स्मृति स्थल बना हुआ है।बचपन से ही देश के प्रति उनकी सोच अलग थी वह कम उम्र मे आजादी की लाडाई मे कूदे थे। बात उस समय की है जब अंग्रेजी हुकूमत की बर्बरता से पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ था। लोग गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए थे।आजादी की चिंगारी फूट चुकी थी। देश के सपूत घरों से निकलकर अंग्रेजों से मोर्चा लेने को तैयार थे।स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कामता प्रसाद ने आजादी की लड़ाई में फूल बाग में झंडा फहराया था जहां पर अंग्रेजों द्वारा गोली भी चलाई गई थी और जिसमें उनके कंधे में गोली लगी थी जिसके बाद वह घायल अवस्था में भर्ती कराए गए थे बाद में उनकी हालत में सुधार हुआ और वह इसी क्षेत्र से आजादी की लड़ाई में संघर्ष करते रहे। देश आजाद होने के बाद से वह अनवरत समाज सेवा में लीन हो गये थे और देश की इसी मिट्टी में विलीन हो गए।एक पुस्तक छपी जिसमें जीवित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सूची जारी की गई आज भी उनका नाम उस पुस्तक में दूसरे नंबर पर दर्ज है जिस में श्री सूरजदिन शुक्ला पुत्र श्री चंद्रिका प्रसाद खानपुर फतेहपुर और दूसरे नंबर पर श्री कामता प्रसाद का नाम साईं पोस्ट मौहार से दर्ज है, आज भी युवाओं के लिए प्रेरक बने आजादी की लड़ाई में कूदने वाले यह क्रांतिकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देश भक्ति की भावना लोगो मे स्मृति स्थल देखकर भर जाती है।चौड़ागरा कस्बे से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर शिवराजपुर रोड पर इनका स्मृति स्थल बना हुआ है जहां पर इन के बेटे साफ सफाई करके वहां एक कमरा भी बना रखा है। साथ ही उनके नाती शिवम तिवारी ने बताया कि हर राष्ट्रीय पर्व पर यहां कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है किंतु ऐसे तमाम लोग हैं जो जन्म स्थान व  ऊनके स्मृति स्थल पर सवाल खड़े करते है जबकि देश की आजादी के लिए के लिए उनके बाबा ने अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए। आज भी पूरे इलाके के लोग उनके जन्मदिन पर खुशियां मनाते हैं व उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित करके गर्व से कहते हैं कि ऐसे क्रांतिकारी के गांव में रहने से स्मृति स्थल बनने से गौरव होता है, इस क्रांतिकारी का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता है।शिवम तिवारी ने बताया कि उनके बाबा का साधारण परिवार में 1913 में जन्म हुआ था जिसके बाद उन्होंने ब्रितानिया हुकूमत द्वारा किए जा रहे देश पर अत्याचार को लेकर के स्वाधीनता में ज्यादा से ज्यादा समय लगा दिया और मन में पढ़ाई लिखाई को छोड़ कर के उन्होंने अपनी कम उम्र में ही देश के प्रति जो उनकी देशभक्ति का जज्बा था उसको विकसित करने के लिए देश को आजाद कराने के लिए उन्होंने देश की आन बान शान और देश को आजाद कराने के लिए जंगे आजादी में कूद पड़े। इस क्षेत्र में वह पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हुए जिन्होंने देश की स्वाधीनता के लिए गोली खाई।उन्होने कहा देश के प्रत्येक नागरिक सैनिको और शहीदो के प्रति अलग भावना रखता जो सम्मान की होती है।लेकिन वही निम्न सोच वाले लोग स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को अपमानित करने का कार्य करते है।जबकि देश का प्रत्येक नागरिक इस देश को गुलामी के दंश से बचाने के लिए अपने प्राणों को जिन्होंने निछावर करने वालो के प्रति श्रद्धा रखता है लेकिन वहीं कुछ लोग केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं सत्ता संग्राम सेनानी पंडित कामता प्रसाद तिवारी उर्फ राम प्रसाद की मृत्यु 13 अगस्त सन 1998 में हुई थी उसके बाद उनके पुत्र कमलाकान्त तिवारी ने इसी रोड पर खाली जमीन पर उनका स्मृति स्थल बनवाया था आज भी वही स्मृति स्थल लोगों के हृदय में अलग स्थान रखता है जो देश भक्ति के प्रति युवा वीरों में जोश भरता है।
आलोक गौड़ नयी सोच

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