Friday, January 18, 2019

यज्ञ मे बिन बुलावे पहुची सती अपमानित होते अग्नी ज्वाला मे बैठ गई,शिव पार्वती विवाह सुन श्रोता मंत्रमुग्ध

मौहार मे कथा सुनाते क्थव्याश,कथा सुनती महिलाए-नई सोच
 आलोक गौड फतेहपुर
 फतेहपुर18जनवरी।मलवॉ विकासखंड के मौहार गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शिव पार्वती के विवाह का प्रसंग को सुनाकर के कथा व्यास ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया शिव पार्वती विवाह शंकर के श्रद्धालु झूमने लगे गीत संगीत के बीच चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास बांदा से आए हुए पंडित राजकुमार बाजपेई ने  दक्ष प्रजापति की पुत्री  पार्वती विवाह देवाधिदेव भोलेनाथ की कथा का प्रसंग सुनाया तो उपस्थित श्रद्धालु झूमने लगे कथा के तीसरे दिन बांदा से आए  पंडित राजकुमार बाजपेई ने श्रोताओं को सारगर्भित प्रसंग के साथ जोड़ते हुए दांपत्य जीवन की मधुरता के संबंध में प्रवचन किया। उन्होंने शिव पार्वती के शुभ विवाह का पावन प्रसंग सुनाकर उपस्थित सभी राम कथा के भक्त श्रोताओं को भावविभोर किया ।कथा का प्रारम्भ त्रेता युग मे भगवान शिव द्वारा माता सती के साथ दंडकारण्य वन में कथा सुनने से होती है।भगवान शिव के द्वारा यह कहना कि हमारे आराध्य इस जंगल मे आये है,माता भगवान की परीक्षा लेने निकल पड़ी । भगवान राम के पास माता सीता के रूप में जाती है तो भगवान राम द्वारा यह कहने के बाद कि माते आप अकेले कैसे।हमारे आराध्य भोलेनाथ कहाँ है ? यह सुनकर माता सती बहुत लज्जित होकर भोलेनाथ के पास लौट आई।भोलेबाबा ने पूछा क्या हमारे आराध्य ने आपकी परीक्षा ली,तब माता बोली नही।तब भोलेनाथ ने अंतर्ध्यान होकर ज्ञान से देखा और सब जान गये और संकल्प लिया – *यह तन सती भेंट अब नाही।* इसके बाद कि कथा में माता सती के पिता दक्ष प्रजापति द्वारा भोलेनाथ के अपमान के लिये यज्ञ करने,माता का भगवान भोलेनाथ के मना करने के वावजूद जाना और अपने पति का अपमान अपने पिता के द्वारा ही करने के प्रयोजन को जानते ही पूरी सभा को श्राप देकर अग्नि कुंड में कूदकर जल जाने का मार्मिक वर्णन प्रस्तुत किया।भगवान भोलेनाथ के गण वीरभद्र द्वारा दक्ष प्रजापति का सिर काटने,यज्ञ को विध्वंस करने और ब्रह्मा जी के निवेदन पर भोलेनाथ द्वारा दक्ष को बकरे के सिर के साथ जीवित कर यज्ञ को पूर्ण करने की कृपा करने की पूरी कथा को श्री राजकुमार बाजपई महाराज ने ऐसी कही मानो आंखों के सामने ही घटित हो रही हो।इसके बाद कि कथा में तारकासुर के आतंक से आतंकित देवो द्वारा भगवान भोलेनाथ के विवाह के लिये ब्रह्मा जी से निवेदन करने की कथा को विस्तार से श्री राजकुमार महाराज ने कही।भगवान भोलेनाथ को समाधि से उठाने के लिये कामदेव द्वारा अपना कामुक तीर चलाना और भोलेनाथ के त्रिनेत्र से भस्म हो जाने की घटना को भी विस्तार से सुनाया । भगवान भोलेनाथ से कामदेव की पत्नी रति का अनुनय विनय करना और भगवान भोलेनाथ द्वारा द्वापर में श्रीकृष्ण अवतार में श्रीकृष्ण पुत्र के रूप में मिलने के प्रसंग को भी सजीव तरीके से सुनाया।श्री महाराज ने हिमालय राज की पुत्री के रूप में माता पार्वती का जन्म लेना,भगवान शिव से विवाह के लिये 12 वर्षो तक कठोर तप करने,सप्त ऋषियों द्वारा प्रेम परीक्षा लेकर आशीष देने की घटना को भी रोचक तरीके से सुनाया।शिव बारात का वर्णन श्री के मुख से आनंदित करने वाला था।भगवान भोलेनाथ की बारात का वर्णन,माता मैना का द्वाराचार के समय आरती करने से इनकार करना आदि को श्री बजपाई जी ने बहुत ही सजीवता के साथ प्रस्तुत किया।माता पार्वती का सखियों एवं माता को अपने जबाबो से संतुष्ट करने का प्रसंग बहुत ही मार्मिक और प्रेरणादायक रहा।अंत मे माता मैना का शादी के बाद माता पार्वती को समझाना कि पति की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है,आज के परिवेश में भी महत्वपूर्ण हो जाता है ।हम सही तुम गलत से बाहर निकलो , हम गलत तुम सही को अपनाओ कथा के बीच मे कथावाचक महाराज ने आजकल दाम्पत्य जीवन मे आ रही खटास पर भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी ।कहा पति पत्नी में प्रेम हो तो भोलेनाथ और माता सती की तरह ।बिना बुलावे के जब माता सती अपने पिता दक्ष प्रजापति के घर आयोजित यज्ञ में जाती है तो माता सती को देख कर दक्ष इस लिये परेशान हो जाते है कि बिन बुलाए सती आ गयी ,और बिन सती भोलेनाथ रह नही सकते जल्दी ही आ जाएंगे।इसको प्रेम कहते है जब दुनिया जान जाये कि ये दो जिस्म जान एक है।आज कल पति पत्नी के झगणो का मूल कारण मेरी बात सही तुम्हारी झूठी है ।अगर इसको पलट दिया जाय और यह कहा जाय मैने जो कही वह झूठी है आप सच्ची बोल रहे है , देखिये कितना मधुर दाम्पत्य जीवन होगा। कथा सुनने को क्षेत्र के तमाम लोग उपस्थित रहे उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा के बाद आरती किया आचार्य मयंक बाजपेई ने पूजन संपन्न कराया कथा के बाद आरती हुई आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया प्रमुख रुप से पूर्व ब्लाक प्रमुख सुरेन्द्र सिंह गौतम उपस्थित रहे।

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