Wednesday, February 20, 2019

धनुष टूटते ही लगे श्रीराम के जयकारे सीता ने पहनाई वरमाला


●युवा विकास समिति के उपाध्यक्ष ने किया शुभारंभ



आलोक गौड/नई सोच
फतेहपुर। अशोथर विकासखंड के मुत्तौर कस्बे में वीरदास बाबा रामलीला कमेटी के द्वारा चौथे दिन की रामलीला में रामलखन का जनकपुर में पुष्प वाटिका, नगरी देखना,स्वयंम्बर स्थली देखना आदि लीला का मंचन किया गया।रामलीला का शुभारंभ युवा विकास समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष अमिततिवारी ने किया इस मौके पर कमेटी के पदाधिकारियों ने  उनका स्वागत भी किया प्रदेश उपाध्यक्ष अमिततिवारी ने कहा आज आवश्यकता है राम के जीवन से सीख ले, भगवान राम का जीवन अनुकरणीय है  जिसके अनुरूप जीवन जीने वाला  व्यक्ति  समाज में सम्मान का पात्र होता है।  इस गांव की रामलीला में  नृत्य नहीं होता है  गांव के बच्चे रामलीला में मंचन करते हैं ।कई देशों के राजाओं ने शिवधनुष तोड़ने का असफल प्रयास कर किया।रावण बाणासुर के बीच ओजस्वी संवाद हुआ।धनुस तोडना छोडो कोई हिला भी न पाया तब जनक जी के मन में चिंता हुई।लखन लाल का रोष, राम जी की शीतलता दिखाई गई।मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान राम ने शिव के इस धनुष को तोड़ने से पूर्व देववंदन किया और सहज में ही धनुष को मध्य से तोड़ दिया। धनुष टूटने के बाद माता सीता ने  श्री राम के  गले में वरमाला पहना दिया  चार और जय जय श्री राम जय जय श्री सीता राम के जयकारे गूंजने लगे ।चारो ओर धनुष टूटने की आवाज सुनकर जनक दरबार में भार्गव परशुराम का प्रवेश होता है।आते ही वह बड़े क्रोध  मे राजा जनक को शिव द्रोही को सामने आने को कहते है, पूछते हैं कि किसने भगवान शिव के प्रिय धनुष को तोड़ा है। वह धनुष तोड़ने वाले को ललकारते हैं। उनके क्रोध को देख कर राजा जनक तो चुप्पी साध जाते हैं, लेकिन लक्ष्मण से उनकी तीखी बहस होती है। बाद में राम बड़े प्रेम से उन्हें समझाते हैं। इससे परशुराम संतुष्ट होकर वापस लौट जाते है।रामलीला के सभी अभियानकर्ताओं का मंचन दर्शकों ने सराहा,मंगलाचार हुआ इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलीला देखने में मंत्रमुग्ध रहे।

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