स्कूल के बच्चे बने मजदूर,सर्दी मे धो रहे बर्तन
आलोक गौड
फतेहपुर। बच्चो की सेहत में इजाफा करने के मद्देनजर प्राइमरी स्कूलों में मिड-डे मील दिया जाता है लेकिन इसी मिड-डे मील के बर्तन धोने में उनकी शिक्षा की सेहत बिगड़ती जा रही है।मलवा विकास खण्ड के ग्राम नूरपुर स्थित प्राथमिक स्कूल परिसर में बुधवार को बच्चे कक्षा में पढ़ाई करने की बजाय मिड-डे मील के भोजन रखने वाले बर्तन धोते नजर आए।कहने को यह काम स्कूल में पदस्थ भोजन बनाने वाले लोगों का है,लेकिन इसे बच्चों से कराया जा रहा है।इस स्कूल में इस तरह की गतिविधि पर आज तक किसी विभागीय अफसर की नजर नहीं पड़ी।जबकिं ग्राम के लोगों का कहना है कि हर दिन यह नजारा उन्हें ऐसे ही देखने को मिलता है।इस प्राथमिक विद्यालय मे कुल49बच्चे कक्षा एक से पाच तक रजिस्टर्ड है जिसमे बुधवार को 17बच्चे उपस्थित रहे।मिडडे मील मीनू मे तहरी परोसा गया।बच्चे खाने से पहले बर्तन धोया और फिर खाया।इस स्कूल की स्थिति बद से बदतर है। स्कूल में देश का भविष्य बर्तन धोने मे मस्त था वहीं शिक्षिकाये आराम फरमा रहे थी।न किसी को किसी अधिकारियों की परवाह न किसी का डर हर दिन की तरह बच्चों ने पहले बर्तन धोए और बाद में मध्यान्ह भोजन का आनंद लिया।जब प्रधानाध्य्पिका किरन से बात किया तो उन्होने बताया रसोइया नही धोती है तो बच्चे स्वयं धोते है।रसोइया कुशमा,और आशा ने कहा की इसमे क्या बुराई है बच्चे अपने खाने के बर्तन तो धो ही सकते है।जबकी शाशन ने यह व्यवस्था किया है की बच्चे बर्तन नही धुलेगे। फिलहाल समय के गर्त हुए इस घटनाक्रम पर एक ही स्लोगन लिखा जा सकता है कि बर्तन धोने स्कूल चले हम....।वहीं इस मामले में मलवा बीआरसी अनीता शाह का कहना है कि आपके द्वारा उक्त मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है मामले की जाँच करवाकर दोषी पाया जाने पर कार्यवाही की जायेगी ।
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| स्कूल परिसर मे लगे हैण्डपम्प मे बर्तन धोते बच्चे |
आलोक गौड
फतेहपुर। बच्चो की सेहत में इजाफा करने के मद्देनजर प्राइमरी स्कूलों में मिड-डे मील दिया जाता है लेकिन इसी मिड-डे मील के बर्तन धोने में उनकी शिक्षा की सेहत बिगड़ती जा रही है।मलवा विकास खण्ड के ग्राम नूरपुर स्थित प्राथमिक स्कूल परिसर में बुधवार को बच्चे कक्षा में पढ़ाई करने की बजाय मिड-डे मील के भोजन रखने वाले बर्तन धोते नजर आए।कहने को यह काम स्कूल में पदस्थ भोजन बनाने वाले लोगों का है,लेकिन इसे बच्चों से कराया जा रहा है।इस स्कूल में इस तरह की गतिविधि पर आज तक किसी विभागीय अफसर की नजर नहीं पड़ी।जबकिं ग्राम के लोगों का कहना है कि हर दिन यह नजारा उन्हें ऐसे ही देखने को मिलता है।इस प्राथमिक विद्यालय मे कुल49बच्चे कक्षा एक से पाच तक रजिस्टर्ड है जिसमे बुधवार को 17बच्चे उपस्थित रहे।मिडडे मील मीनू मे तहरी परोसा गया।बच्चे खाने से पहले बर्तन धोया और फिर खाया।इस स्कूल की स्थिति बद से बदतर है। स्कूल में देश का भविष्य बर्तन धोने मे मस्त था वहीं शिक्षिकाये आराम फरमा रहे थी।न किसी को किसी अधिकारियों की परवाह न किसी का डर हर दिन की तरह बच्चों ने पहले बर्तन धोए और बाद में मध्यान्ह भोजन का आनंद लिया।जब प्रधानाध्य्पिका किरन से बात किया तो उन्होने बताया रसोइया नही धोती है तो बच्चे स्वयं धोते है।रसोइया कुशमा,और आशा ने कहा की इसमे क्या बुराई है बच्चे अपने खाने के बर्तन तो धो ही सकते है।जबकी शाशन ने यह व्यवस्था किया है की बच्चे बर्तन नही धुलेगे। फिलहाल समय के गर्त हुए इस घटनाक्रम पर एक ही स्लोगन लिखा जा सकता है कि बर्तन धोने स्कूल चले हम....।वहीं इस मामले में मलवा बीआरसी अनीता शाह का कहना है कि आपके द्वारा उक्त मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है मामले की जाँच करवाकर दोषी पाया जाने पर कार्यवाही की जायेगी ।

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