Sunday, April 7, 2019

सती ने नही माना शिव की बात,शिव ने किया सती का त्याग

पति पत्नी को एक दूसरे की माननी चाहिए बात-वैदेही

 सती ने नही माना शिव की बात,शिव ने किया सती का त्याग
रामकथा सूनाती वैदेही
                       

आलोक गौड-नई सोच

बिन्दकी-फतेहपुर।विश्वास हर रिश्ते की जड़ होती है जब पति-पत्नी का एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते हैं तो वैवाहिक जीवन मे अशाती होना तय है।इसीलिए पति-पत्नी को एक दूसरे को हर बात बताना चाहिए ताकि दोनों के बीच भरोसा बना रहे।उक्त विचार गुरु रामभद्राचार्य की कृपा पात्र शिष्या चित्रकूट से आई कथावाचिका मानस चेतकी वैदेही ने कहा।बिन्दकी नगरी के रामलीला मैदान मे रामनवमी महोत्सव मेला व रामकथा शुरु है।कथा के दौरान मानस चेतकी वैदेही ने  सती प्रसंग सुनाया उन्होने बताया एक बार त्रेता जुग माहीं।संभु गए कुंभज रिषि पाहीं...एक बार शिव जी अगस्त्य ऋषि के पास गये सती भी साथ थी,ऋषि ने रामकथा विस्तार से कहा।सती को यह थोड़ा अजीब लगा कि श्रीराम शिव के आराध्य देव हैं।सती का ध्यान कथा में नहीं रहा और वह यह सोचतीं रहीं कि शिव जो तीनों लोकों के स्वामी हैं,वे श्रीराम की कथा सुनने के लिए क्यों आए हैं।

कथा समाप्त हुई और शिव-सती वापस कैलाश पर्वत लौटने लगे।उस समय रावण ने सीता का हरण किया था और श्रीराम,सीता की खोज में भटक रहे थे।सती को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि शिव जिसे अपना आराध्य देव कहते हैं,वह एक स्त्री के वियोग में साधारण इंसान की तरह रो रहा है।सती ने शिवजी के सामने ये बात कही तो शिव ने समझाया कि यह सब श्रीराम की लीला है।भ्रम में मत पड़ो, लेकिन सती नहीं मानी और शिवजी की बात पर विश्वास नहीं किया।सती ने श्रीराम की परीक्षा लेने की बात कही तो शिवजी ने रोका,लेकिन सती पर शिवजी की बात का कोई असर नहीं हुआ।सती, सीता जी का रूप धारण करके श्रीराम के सामने पहुंच गईं।श्रीराम ने सीता के रूप में सती को पहचान लिया और पूछा कि हे माता,आप अकेली इस घने जंगल में क्या कर रही हैं।शिवजी कहां हैं।जब श्रीराम ने सती को पहचान लिया तो वे डर गईं और चुपचाप शिव के पास लौट आईं।जब शिव जी ने सती से पूछा की वो कहां गई थीं तो वह कुछ जवाब ना दे सकीं, लेकिन शिव सब समझ गए थे। कि जिन श्रीराम को वे अपना आराध्य देव मानते हैं,सती ने उनकी पत्नी का रूप धारण करके उनकी परीक्षा लेकर उनका अनादर किया है।इस कारण शिवजी ने मन ही मन सती का त्याग कर दिया।सती भी ये बात समझ गईं और दक्ष के यज्ञ में जाकर आत्मदाह कर लिया।मानस चेतकी वैदेही ने कहा 

कई बार पत्नियां पति की और पति पत्नी की बात पर विश्वास नहीं करते। इसका नतीजा यह होता है कि रिश्ते में बिखराव आ जाता है।इस मौके पर आयोजक रामभक्त सेवा समिति के अध्यक्ष ओमजी हिन्दू, रतन टाटा,सौरभ गुप्ता,सोम,मंगलम ओमर,अनमोल राजा अंकित,वेद प्रकाश,अभिसेक,रौनक ओमर अन्नू गुप्ता,बरातीलाल निषाद आदि रहे।

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