Tuesday, April 9, 2019

मुश्किल क्षणों में भी राम गरिमापूर्ण रहे :आचार्य




आलोक गौड-नई सोच
फतेहपुर(औंग)। विकासखंड मलवा के गोधरौली गांव के नृत्य पति साकेत बिहारी विराजमान मंदिर में चल रहे दस दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान रामचरितमानस कथा व नवाह पाठ, बधाई में आचार्यो द्वारा रामरस धार बहाई जा रही है।जिसमें कथावाचक राघवशरण जी महाराज ने कहा राम, दशरथ और कौशल्या के पुत्र थे। संस्कृत में दशरथ का अर्थ है- दस रथों का मालिक। अर्थात पांच कर्मेंद्रियों और पांच ज्ञानेंद्रियों का स्वामी। कौशल्या का अर्थ है- ‘कुशलता’। जब कोई अपनी कर्मेंद्रियों पर संयम रखते हुए अपनी ज्ञानेंद्रियों को मर्यादापूर्वक सन्मार्ग की ओर प्रेरित करता है तो उसका चित्त स्वाभाविक रूप से राम में रमने लगता है।पूजा-अर्चना की तमाम सामग्रियां उसके लिए गौण हो जाती हैं।ऐसे व्यक्ति का व्यक्तित्व इतना सहज और सरल हो जाता है कि वह जीवन में आने वाली तमाम मुश्किलों का स्थितप्रज्ञ होकर मुस्कुराते हुए सामना कर लेता है।भारतीय जनमानस में राम का महत्व इसलिए नहीं है कि उन्होंने जीवन में इतनी मुश्किलें झेलीं, बल्कि उनका महत्व इसलिए है,क्योंकि उन्होंने उन तमाम कठिनाइयों का सामना बहुत ही सहजता से किया। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भी इसलिए कहते हैं,क्योंकि अपने सबसे मुश्किल क्षणों में भी उन्होंने स्वयं को बेहद गरिमापूर्ण रखा। मंदिर के महंत सीताकांत शरण जी महाराज ने भी कथा सुनाया। इस मौके पर कथा सुनने को काफी संख्या में लोग एकत्रित रहे। कथा समापन पर आरती और प्रसाद वितरित किया गया। आचार्य धर्मेंद्र शरण, स्वामी नारदानंद, रामशंकर, शिवम आदि उपस्थित रहे।

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