*●राम नाम को हृदय मे अंगीकार कर रहे भक्त●*
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रामविवाह की कथा सुन श्रोता हूए भाव विह्ववल
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गोधरौली मे बह रही रामरस भक्ती की बयार
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भक्त भजन और भगवान का अनूठा संगम
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*(आलोक गौड -नई सोच)*
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फतेहपुर।विकास खण्ड मलवा के गोधरौली के नृत्य पति साकेत विहारी ठाकुर विराजमान मंदिर मे चल रहे धार्मिक अनुष्ठान से गुजायमाँन रामनाम धुन को भक्त अपने हृदय मे अंगीकार कर रहे है।आचार्यो के मुखारविंद से रामनाम की गुंजित मधुर ध्वनी भक्तो को इस चैत्र की गर्मी मे भी शीतलता का अनुभव करा रही है।लोग दोपहर3बजे से ही कथा पंडाल मे पहुच रामनाम की धूनी रमाने के लिये अपना स्थान सुनिश्चित कर लेते है।भक्त और भजन का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है जिसे कोई भी देख के शबरी मीरा और ध्रुव द्वारा की गइ प्रभु की भक्ति को समझ सकता है।ध्वनी विस्तारक यत्रो से निकलती भजनो की मधुर ध्वनी भक्तो को अनायास कथा पंडाल मे खीच ला रही है।भक्त पूर्ण भक्ती रस मे सराबोर हो झूम रहे है,मानो त्रेता मे अयोध्या का भी यही हाल रहा होगा चारो ओर खुशहाली का महौल है।राम का जन्म हो चुका है।
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कथा के चतुर्थ दिवस आचार्य राघवशरण जी महाराज ने श्रोताओ को बताया की गाधि के पुत्र मुनि विश्वामित्र जप, यज्ञ,योग करते है और मारिच व सुबाहु जैसे राक्षसो से ड़रते है क्योकि राक्षस आकर यज्ञ मे विघ्न डालते है मुनि विचार कर अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ से उनके दोनो पुत्र राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले आते है जहा राम एक ही बाण से ताड्का का वध करते है तो वही मारिच व सुबाहु का भी वध कर मुनि के यज्ञ की रक्षा करते है।उधर मिथिला नरेश अपनी पुत्री वैदेही जानकी के विवाह के लिये स्वयंबर रचाया है जहा जो धनुष तोडगा सीता उसे वरमाला पहनायेगी।मुनि विश्वामित्र को आमंत्रित किया गया है।दोनो राजकुमार को जब यह पता चलता है तो मुनि के साथ वह भी चल देते है।आचार्य ने रामचरितमानस की चौपाई से बताया धनुष यज्ञ सूनि रघुकुल नाथा,हरषि चले मुनिवर कै साथा.. दोनों राजकुमार गुरु के साथ गौतम ऋषि के आश्रम में पहुंचते है।पत्थर की नारी देख कर गुरु जी राम को बताते है कि श्राप के कारण ऋषि पत्नी आहित्या पत्थर की हो गई है। भगवान राम ने जैसे ही अंगूठा स्पर्स कराया पत्थर की आहिल्या नारी बन गई।पूरे आश्रम में खुशी का माहौल हो जाता है। इसके बाद गंगा पार करते हुए दोनो भाई जनकपुर सुंदर निवास में पहुंच जाते है।वहा तमाम राजा जब धनुष को हिला तक नही पाते गुरु की आज्ञा पाकर राम धनुष को तोड देते है सीता मगलगीतो के बीच राम को वरमाला पहनाती है।
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वही मंहत सीताकांत शरण जी महाराज ने श्रोताओ को राम की महिमा बताया कहा राम शील,सदाचार,मंगल,मैत्री, करुणा,क्षमा,सौंदर्य और भक्ति का पर्याय हैं।भक्त सतत साधना के द्वारा अपने संस्कारों का परिशोधन कर राम के इन तमाम सद्गुणों को अंगीकार कर लेता है तो उसका चित्र इतना निर्मल और पारदर्शी हो जाता है कि उसे अपने अंतःकरण में राम के अस्तित्व का एहसास होने लगता है।कथा के बाद आरती और प्रसाद वितरित किया गया।आचार्य धर्मेंद्र शरण स्वामी नारदा नंद जी कल्लू सिंह मनीस सुनील रामशंकर मुन्नू सिंह राजाराम सिंह छोटे शुभम जुगराज किशन नारायण अंशुल सीताराम आदि उपस्थित रहे।
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रामविवाह की कथा सुन श्रोता हूए भाव विह्ववल
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| कथा सुनाते आचार्य |
गोधरौली मे बह रही रामरस भक्ती की बयार
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भक्त भजन और भगवान का अनूठा संगम
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*(आलोक गौड -नई सोच)*
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फतेहपुर।विकास खण्ड मलवा के गोधरौली के नृत्य पति साकेत विहारी ठाकुर विराजमान मंदिर मे चल रहे धार्मिक अनुष्ठान से गुजायमाँन रामनाम धुन को भक्त अपने हृदय मे अंगीकार कर रहे है।आचार्यो के मुखारविंद से रामनाम की गुंजित मधुर ध्वनी भक्तो को इस चैत्र की गर्मी मे भी शीतलता का अनुभव करा रही है।लोग दोपहर3बजे से ही कथा पंडाल मे पहुच रामनाम की धूनी रमाने के लिये अपना स्थान सुनिश्चित कर लेते है।भक्त और भजन का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है जिसे कोई भी देख के शबरी मीरा और ध्रुव द्वारा की गइ प्रभु की भक्ति को समझ सकता है।ध्वनी विस्तारक यत्रो से निकलती भजनो की मधुर ध्वनी भक्तो को अनायास कथा पंडाल मे खीच ला रही है।भक्त पूर्ण भक्ती रस मे सराबोर हो झूम रहे है,मानो त्रेता मे अयोध्या का भी यही हाल रहा होगा चारो ओर खुशहाली का महौल है।राम का जन्म हो चुका है।
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कथा के चतुर्थ दिवस आचार्य राघवशरण जी महाराज ने श्रोताओ को बताया की गाधि के पुत्र मुनि विश्वामित्र जप, यज्ञ,योग करते है और मारिच व सुबाहु जैसे राक्षसो से ड़रते है क्योकि राक्षस आकर यज्ञ मे विघ्न डालते है मुनि विचार कर अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ से उनके दोनो पुत्र राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले आते है जहा राम एक ही बाण से ताड्का का वध करते है तो वही मारिच व सुबाहु का भी वध कर मुनि के यज्ञ की रक्षा करते है।उधर मिथिला नरेश अपनी पुत्री वैदेही जानकी के विवाह के लिये स्वयंबर रचाया है जहा जो धनुष तोडगा सीता उसे वरमाला पहनायेगी।मुनि विश्वामित्र को आमंत्रित किया गया है।दोनो राजकुमार को जब यह पता चलता है तो मुनि के साथ वह भी चल देते है।आचार्य ने रामचरितमानस की चौपाई से बताया धनुष यज्ञ सूनि रघुकुल नाथा,हरषि चले मुनिवर कै साथा.. दोनों राजकुमार गुरु के साथ गौतम ऋषि के आश्रम में पहुंचते है।पत्थर की नारी देख कर गुरु जी राम को बताते है कि श्राप के कारण ऋषि पत्नी आहित्या पत्थर की हो गई है। भगवान राम ने जैसे ही अंगूठा स्पर्स कराया पत्थर की आहिल्या नारी बन गई।पूरे आश्रम में खुशी का माहौल हो जाता है। इसके बाद गंगा पार करते हुए दोनो भाई जनकपुर सुंदर निवास में पहुंच जाते है।वहा तमाम राजा जब धनुष को हिला तक नही पाते गुरु की आज्ञा पाकर राम धनुष को तोड देते है सीता मगलगीतो के बीच राम को वरमाला पहनाती है।
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वही मंहत सीताकांत शरण जी महाराज ने श्रोताओ को राम की महिमा बताया कहा राम शील,सदाचार,मंगल,मैत्री, करुणा,क्षमा,सौंदर्य और भक्ति का पर्याय हैं।भक्त सतत साधना के द्वारा अपने संस्कारों का परिशोधन कर राम के इन तमाम सद्गुणों को अंगीकार कर लेता है तो उसका चित्र इतना निर्मल और पारदर्शी हो जाता है कि उसे अपने अंतःकरण में राम के अस्तित्व का एहसास होने लगता है।कथा के बाद आरती और प्रसाद वितरित किया गया।आचार्य धर्मेंद्र शरण स्वामी नारदा नंद जी कल्लू सिंह मनीस सुनील रामशंकर मुन्नू सिंह राजाराम सिंह छोटे शुभम जुगराज किशन नारायण अंशुल सीताराम आदि उपस्थित रहे।
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