फतेहपुर(नई सोच,आलोक गौड)माता पिता की सेवा से परमात्मा प्रसन्न होते है।माता पिता की सेवा से धन,वैभव,आयु,बल,कीर्ति मे वृद्धी होती है।हर बच्चे को माता पिता की आजीवन सेवा का संकल्प लेना चाहिए।उक्त विचार बबई मे श्रीमदभागवत कथा के दौरान आचार्य राघव जी महाराज ने कही।उन्होने गीत-संगीत के माध्यम से माता पिता की सेवा की चर्चा किया।जनपद के अमौली विकास खण्ड के अंतर्गत बबई गाव के महामहेश्वर धाम मे शहीद पं.रामदुलारे तिवारी की स्मृति में श्रीमद्भागवत कथा के साथ धार्मिक आयोजन चल रहा है।
आयोजित पंच दिवसीय रुद्र महायज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस वृन्दावन से पधारे कथावाचक राघव जी महाराज द्वारा संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा का रसपान कराया गया।उन्होने कहा श्रीमद्भागवत महापुराण सभी महापुराणों में श्रेठ है, भागवत सुनने मात्र से व्यक्ति का उद्धार नही हो सकता अपितु सुनने के साथ उसको अपनी जीवन शैली में उतारना होगा।भागवताचार्य ने गोकर्ण महाराज,धुँधली और धुँधकारी के रोचक प्रसंग सुनाए।भगवान के विभिन्न अवतारों के प्रश्नों के बारे में चर्चा की।उन्होंने माता पिता की सेवा की विस्तार से चर्चा किया।कहा माता पिता के सेवा में परमात्मा प्रसन्न होने का भेद छिपा होता है।माता पिता की सेवा से परमात्मा को प्रसन्न किया जा सकता है।परीक्षित महाराज के जन्म की कथा को विस्तार से सुनाया।कार्यक्रम में महेश शुक्ल व उनकी पत्नी रानी देवी ने परीक्षित बन कथा श्रवण किया।कथा सुनने के लिए दूर दूर से लोग सैकड़ों की संख्या में महिलाएं बच्चे व बुजुर्ग पहुच रहे है।इस मौके पर ओमप्रकाश तिवारी, कीर्तिदेव तिवारी,कृष्णा तिवारी, अनुपम मिश्र,मयंक,रमई,जनार्दन प्रसाद सहित कई लोग उपस्थित रहे।
#alok_gaud
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| कथा सुनाते आचार्य राघव जी:नई सोच |
आयोजित पंच दिवसीय रुद्र महायज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस वृन्दावन से पधारे कथावाचक राघव जी महाराज द्वारा संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा का रसपान कराया गया।उन्होने कहा श्रीमद्भागवत महापुराण सभी महापुराणों में श्रेठ है, भागवत सुनने मात्र से व्यक्ति का उद्धार नही हो सकता अपितु सुनने के साथ उसको अपनी जीवन शैली में उतारना होगा।भागवताचार्य ने गोकर्ण महाराज,धुँधली और धुँधकारी के रोचक प्रसंग सुनाए।भगवान के विभिन्न अवतारों के प्रश्नों के बारे में चर्चा की।उन्होंने माता पिता की सेवा की विस्तार से चर्चा किया।कहा माता पिता के सेवा में परमात्मा प्रसन्न होने का भेद छिपा होता है।माता पिता की सेवा से परमात्मा को प्रसन्न किया जा सकता है।परीक्षित महाराज के जन्म की कथा को विस्तार से सुनाया।कार्यक्रम में महेश शुक्ल व उनकी पत्नी रानी देवी ने परीक्षित बन कथा श्रवण किया।कथा सुनने के लिए दूर दूर से लोग सैकड़ों की संख्या में महिलाएं बच्चे व बुजुर्ग पहुच रहे है।इस मौके पर ओमप्रकाश तिवारी, कीर्तिदेव तिवारी,कृष्णा तिवारी, अनुपम मिश्र,मयंक,रमई,जनार्दन प्रसाद सहित कई लोग उपस्थित रहे।
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