![]() |
| photo source - internet |
नई सोच, भारत। जनवरी को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। हिंदू मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का जन्म हुआ था। हिंदू धर्म में प्रचलित कथा के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही ब्रह्मा जी ने मां सरस्वती की संरचना की थी। ब्रह्मा जी ने ऐसी देवी की संरचना की, जिनके चार हाथ थे। एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने देवी को वीणा बचाने के लिए, जिसके बाद संसार में मौजूद सभी चीजों में स्वर आ गया और इसी वजह से उन्होंने सरस्वती मां को वाणी की देवी का नाम दिया। इस वजह से मां सरस्वती को ज्ञान, संगीत और कला की देवी कहा जाता है। अगर आप भी मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं, तो यहां दी गई विधि को अपनाएं।
1. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने के लिए सबसे पहले सरस्वती की प्रतिमा रखें।
2. कलश स्थापित कर सबसे पहले भगवान गणेश का नाम लेकर पूजा करें।
3. सरस्वती माता की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आमचन और स्नान कराएं।
4. माता को पीले रंग के फूल अर्पित करें, फिर मां सरस्वती का पूरा श्रृंगार करें।
5. मां के चरणों पर गुलाल अर्पित करें।
6. सरस्वती मां पीले फल या फिर मौसमी फलों के साथ-साथ बूंदी चढ़ाएं।
7. माता को मालपु, और खीर का भोग लगाएं।
8. सरस्वती ज्ञान और वाणी की देवी हैं। पूजा के समय पुस्तकें या फिर वाद्ययंत्रों का भी पूजन करें।
9. कई लोग बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन हवन से करते हैं। अगर आप हवन करें तो सरस्वती माता के नाम से ओम श्री सरस्वत्यै नम: स्वहा इस मंत्र से एक सौ आठ बार जाप करें।
सरस्वती मां के वंदना मंत्र का करें जाप
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिदेर्वै: सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम॥

jai mata di
ReplyDelete