शहीद की स्मृति मे बबई मे चल रहा साप्ताहिक कार्यक्रम
प्रवाहित ज्ञान गंगा मे गोते लगा रहे श्रद्धालु भक्तगण
(आलोक गौड-नई सोच)
अमौली-फतेहपुर।विकास खण्ड अमौली के ग्राम बबई के महामहेश्वर धाम में शहीद प0 राम दुलारे तिवारी की स्मृति में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान गंगा मे श्रद्धालु भक्त गोते लगा रहे है।कथा के तृतीय दिवस वृन्दावन धाम से पधारे कथाव्यास राघव जी महाराज ने वाराह अवतार,जडभरत,ध्रुव की कथा सुना मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथाव्यास ने बताया कि सृष्टि की रचना के लिए एवं पृथ्वी से राक्षसों का संहार करने के लिए भगवान वाराह स्वरूप धारण कर अवतरित हुए।उन्होने संसार सागर से विरक्ति धारण किए हुए जड़भारतोपाख्यान की कथा का वर्णन किया।भक्त शिरोमणि ध्रुवजी महाराज की कथा सुनाई।भगवान के भजन के लिए कोई समय निर्धारित नही होता है।पांच वर्ष की आयु के ध्रुव को भगवान ने आकर दर्शन दिए। भगवत भजन के लिए युवावस्था सर्वश्रेष्ठ है।कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहि पारा।कलयुग में भगवान का नाम लेकर भाव सागर से कोई भी पार हो सकता है अपितु वह नाम छल कपट ईर्ष्या और कुटिलता से रहित होना चाहिए।महेश शुक्ल व उनकी पत्नी रानी देवी ने परीक्षित बन कथा श्रवण किया।इस मौके पर ओमप्रकाश तिवारी, कीर्तिदेव तिवारी, कृष्णा तिवारी, अनुपम मिश्र,मयंक,अरुण तिवारी, शिवशंकर, रमई, जनार्दन प्रसाद उपस्थित रहे।नई सोच आलोक गौड
प्रवाहित ज्ञान गंगा मे गोते लगा रहे श्रद्धालु भक्तगण
(आलोक गौड-नई सोच)
अमौली-फतेहपुर।विकास खण्ड अमौली के ग्राम बबई के महामहेश्वर धाम में शहीद प0 राम दुलारे तिवारी की स्मृति में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान गंगा मे श्रद्धालु भक्त गोते लगा रहे है।कथा के तृतीय दिवस वृन्दावन धाम से पधारे कथाव्यास राघव जी महाराज ने वाराह अवतार,जडभरत,ध्रुव की कथा सुना मंत्रमुग्ध कर दिया।
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| बबई मे कथा सुनते श्रद्धालू,कथा सुनाते आचार्य राघव(इनसेट) |
कथाव्यास ने बताया कि सृष्टि की रचना के लिए एवं पृथ्वी से राक्षसों का संहार करने के लिए भगवान वाराह स्वरूप धारण कर अवतरित हुए।उन्होने संसार सागर से विरक्ति धारण किए हुए जड़भारतोपाख्यान की कथा का वर्णन किया।भक्त शिरोमणि ध्रुवजी महाराज की कथा सुनाई।भगवान के भजन के लिए कोई समय निर्धारित नही होता है।पांच वर्ष की आयु के ध्रुव को भगवान ने आकर दर्शन दिए। भगवत भजन के लिए युवावस्था सर्वश्रेष्ठ है।कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहि पारा।कलयुग में भगवान का नाम लेकर भाव सागर से कोई भी पार हो सकता है अपितु वह नाम छल कपट ईर्ष्या और कुटिलता से रहित होना चाहिए।महेश शुक्ल व उनकी पत्नी रानी देवी ने परीक्षित बन कथा श्रवण किया।इस मौके पर ओमप्रकाश तिवारी, कीर्तिदेव तिवारी, कृष्णा तिवारी, अनुपम मिश्र,मयंक,अरुण तिवारी, शिवशंकर, रमई, जनार्दन प्रसाद उपस्थित रहे।नई सोच आलोक गौड

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