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Monday, April 13, 2020

फेसबुक पर लाईव आकर लोगों को जागरूक कर रहे आलोक गौड़

अपने फेसबुक पेज से लोगो को जागरूक करते आलोक गौड़
शिवम तिवारी, नई सोच समाचार।
चौडगरा/फतेहपुर 13 अप्रैल। पूरी दुनिया कोरोना के कहर से जूझ रही है। भारत में लॉकडाउन के चलते लोग घरों में कैद हैं।ऐसे में कई तरह की आशंकाओं के साथ दहशत का माहौल है। लोगों को इन सब आशंकाओं से उबारने और हौसला अफजाई के लिए युवा विकास समिति के जिला प्रवक्ता आलोक गौड मैदान में हैं,लेकिन इस बार मैदान ऑनलाइन है।जी हा फेसबुक मे समय समय पर लाईव आकर वह लोगो को कोरोना वायरस से बचने के लिये जागरुक कर रहे है। मलवां ब्लाक के जलाला निवासी आलोक गौड समाजिक कार्यो मे निरंतर अग्रसर रहते है। कोरोना वायरस के चलते अब वह शोशल साइटस से लोगो को जागरुक करने की मुहिम चला रहे है। उन्होने लाकड़ाऊन के अब तक के समय मे कई बार लाईव आकर कहा है कि कोरोना से घबराना नहीं बल्कि सतर्कता बरतें। भीड़भाड़ में जाने से बचें,बार-बार हाथ धोएं। साथ ही सरकार और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।उनकी बातो का असर भी हुआ और फेसबुक मे जुडे सैकड़ो लोगो ने टिप्पणियाँ कर अपना समर्थन भी दिया है। समिति के प्रवक्ता आलोक गौड ने कहते है"इस समय न किसी मिल सकते है और न कही जा सकते है तब मैने फेसबुक को माध्यम बनाया और अपने दोस्तो के साथ लाईव आकर कोरोना से बचाव के लिये घर मे रहने की अपील और नियमो का पालन करने की विनती किया और काफी हद तक लोगो ने समर्थन दिया।"

Wednesday, February 19, 2020

धार्मिक प्रसंगो की कथा सुन श्रोता मंत्रमुग्ध

शहीद की स्मृति मे बबई मे चल रहा साप्ताहिक कार्यक्रम

प्रवाहित ज्ञान गंगा मे गोते लगा रहे श्रद्धालु भक्तगण

(आलोक गौड-नई सोच)
अमौली-फतेहपुर।विकास खण्ड अमौली के ग्राम बबई के महामहेश्वर धाम में शहीद प0 राम दुलारे तिवारी की स्मृति में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान गंगा मे श्रद्धालु भक्त गोते लगा रहे है।कथा के तृतीय दिवस वृन्दावन धाम से पधारे कथाव्यास राघव जी महाराज ने वाराह अवतार,जडभरत,ध्रुव की कथा सुना मंत्रमुग्ध कर दिया।


बबई मे कथा सुनते श्रद्धालू,कथा सुनाते आचार्य राघव(इनसेट)

कथाव्यास ने बताया कि सृष्टि की रचना के लिए एवं पृथ्वी से राक्षसों का संहार करने के लिए भगवान वाराह स्वरूप धारण कर अवतरित हुए।उन्होने संसार सागर से विरक्ति धारण किए हुए जड़भारतोपाख्यान की कथा का वर्णन किया।भक्त शिरोमणि ध्रुवजी महाराज की कथा सुनाई।भगवान के भजन के लिए कोई समय निर्धारित नही होता है।पांच वर्ष की आयु के ध्रुव को भगवान ने आकर दर्शन दिए। भगवत भजन के लिए युवावस्था सर्वश्रेष्ठ है।कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहि पारा।कलयुग में भगवान का नाम लेकर भाव सागर से कोई भी पार हो सकता है अपितु वह नाम छल कपट ईर्ष्या और कुटिलता से रहित होना चाहिए।महेश शुक्ल व उनकी पत्नी रानी देवी ने परीक्षित बन कथा श्रवण किया।इस मौके पर ओमप्रकाश तिवारी, कीर्तिदेव तिवारी, कृष्णा तिवारी, अनुपम मिश्र,मयंक,अरुण तिवारी, शिवशंकर, रमई, जनार्दन प्रसाद उपस्थित रहे।नई सोच आलोक गौड

Saturday, March 9, 2019

गावो व शहरो के बीच भटकी युवा पीढी,वर्तमाँन मे विकास के परिदृश्य

गावो और शहरो के बीच खाई मे भटकी युवा पीढ़ी-आलोक गौड

समिति के जिला प्रवक्ता आलोक गौड

फतेहपुर।‘युवा’ समाज का वह हिस्सा है,जिसके द्वारा किसी देश का भविष्य निर्मित होता है।उसकी उम्र के साथ-साथ उसकी आँखों में बड़े-बड़े सपनों की संख्या भी बढ़ती जाती है।इन्हीं सपनों की पूर्ति हेतु उसे जीवन में कई बार बड़े-बड़े जोखिम भी उठाने पड़ते हैं।संभव-असंभव के संशय त्यागने पड़ते हैं। ऐसे विचार युवा विकास समिति जिला प्रवक्ता आलोक गौड़ के हैं उन्होंने युवाओं  को जागरूक कर  सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लगा रखा है सामाजिक संगठन युवा विकास समिति द्वारा निरंतर समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट भूमिका का निर्वाहन किया जा रहा है उन्होंने कहा स्वामी विवेकानंद जी का सुविचार है कि संभव की सीमा जानने का केवल एक ही तरीका है,असंभव से भी आगे निकल जाना।उन्होंने देश के युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा था –युवाओं उठो, जागो और उदेश्य प्राप्ति के पहले मत रुको। विवेकानन्द जी के ये विचार देश की युवा पीढ़ी के लिए ही नहीं, अपितु राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाने वाले महापुरुषों के लिए भी प्रेरणास्रोत रहे हैं। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, आजाद, मदर टेरेसा, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, सानिया मिर्जा, पी.वी सिन्धु, गीता फोगाट तथा मानुषी छिल्लर आदि ने समाज को बेहतर बनाने और उसे नए शिखरों पर ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वर्तमान भारत को ‘युवा भारत’ कहा जाता है, क्योंकि हमारे देश की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा युवा पीढ़ी ही है। जिसमें आधे से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। गाँव में रहने वाले युवाओं तथा शहरी युवा-वर्ग के बीच रहन-सहन, शिक्षा, परिवेश, क्षमता आदि सभी स्तरों पर बड़ा भारी अंतर दिखाई देता है। 13 से 35 वर्ष की उम्र वाली पीढ़ी यदि सुंदर चारित्रिक दृढ़ता, नैतिक मूल्यों, मानसिक, धार्मिक व आध्यात्मिक शक्तियों से परिपूर्ण होगी, तो नि:संदेह ही एक सुंदर-स्वस्थ तथा विकसित राष्ट्र की कल्पना की जा सकती है। लेकिन ग्रामीण और शहरी वर्गों में बंटा यह समाज असमानता की एक ऐसी धुरी पर टिका है। जहाँ गाँवों की स्थिति शहरों की तुलना में अधिक दयनीय है। ग्रामीण युवाओं को मूल्यरहित शिक्षा, बेरोजगारी, उचित मार्गदर्शन का अभाव, टेलीविजन/इंटरनेट की ग्लैमरस दुनिया के शार्टकट्स आदि ने भटकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। साथ ही गाँवों और शहरों के बीच पसरी खाई ने युवाओं में एक दुराव की स्थिति बना दी है। गांवों में बसने वाला जब शहरी वातावरण के रंग-ढंग जान लेता है तो वह वापिस गाँव लौटना नहीं चाहता। ऐसे में शहर में पला-बड़ा युवा गाँवों के विकास की सुध क्यूँ लेगा? शिक्षा की बुनियादी और व्यावहारिक उपयोगिता की स्थिति गाँवों के साथ-साथ शहरों में भी त्रस्त दिखाई देती है। इन युवाओं में नकारात्मकता का स्तर तेजी से बढ़ता जा रहा हैं, जिससे वे शीघ्र ही अपना संयम खो देते हैं। जल्दी से जल्दी उच्च पद, पैसा-शोहरत पाने के लिए गलत काम और शोर्टकट्स लेते हुए भी नहीं कतराते। ऐसी विपरीत परिस्थितियों के बीच फंसी युवाओं की बड़ी  संख्या गुमराह हो हिंसात्मक कार्यों, उपद्रवों, हड़तालों, अपराधों, नक्सलवाद, आतंकवाद आदि रास्तों पर निकल पड़ती है। जो किसी भी देश-समाज के लिए एक बड़े खतरे का कारण हैं। इस दिशाहीन विशेषकर गांवों में बसने वाली तथा पलायन से हताश युवा पीढ़ी को सही मार्ग पर लाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं? उन्हें बुनियादी व रोजगार युक्त शिक्षा देने के लिए कौन-सी योजनाएं बनाई गई हैं? गाँवों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सरकार द्वारा क्या-क्या योजनाएं उपलब्ध कराई गई हैं, और किन योजनाओं का युवाओं ने सफलतापूवर्क उपयोग करके गांवों की स्थिति में सुधार किया है? गाँवों में स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु युवाओं ने क्या बड़े बदलाव किए हैं? किसानों की फसल से जुड़ी सरकारी सुविधा तथा नई तकनीकों के इस्तेमाल की जानकारी में युवा कैसे भूमिका निभा रहे हैं? युवा विकास समिति समाजसेवी संगठन के माध्यम से युवा कैसे ग्राम विकास की स्थिति में सुधार कर रहे हैं? साथ ही गाँवों की समस्याओं को लेकर युवाओं की सजग भागीदारी कितनी सफल रही है? गांवों में युवाओं का एक बड़ा तबका बेशक असुविधाओं एवं आर्थिक कमजोरी के कारण पीछे रह जाता हो, लेकिन उन्हीं में से कुछ होनहार ऐसे भी निकलते हैं जो अपने समाज ही नहीं, देश को भी गौरवान्वित करते हैं । युवा-युवा के बीच की खाई को पाटकर उन्हें जागरूक कर कैसे अपने संगठनों का हिस्सा बनाकर रोजगार के अवसर दे रहे हैं? आदि इन सभी प्रश्नों के माध्यम से मैनें ग्रामीण विकास में युवाओं की भूमिका आंकने का प्रयास किया है।

Tuesday, January 29, 2019

गरीबो को कम्बल बाट दी राहत

चौडगरा।फतेहपुर।मगलवार को कस्बे के रामखेलावन चौहान के आवास पर कम्बल वितरण कार्यक्रम हुआ।इस कार्यक्रम मे बिन्दकी विधायक करण पटेल मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हूए।कंबल वितरण कार्यक्रम में 45 गरीब जरूरतमंदो को कंबल वितरित किए गए।मुख्य अतिथि विधायक ने कहा इस भीषण ठंड मे असहाय गरीबो को ठंड से निजात दिलाए जाने जैसा और पुण्य का कोई कार्य नहीं हो सकता।भूख से लोगो की जान नहीं जा सकती किन्तु ठंड से जान जाने मे देरी नहीं होती।वर्तमान समय मे चल रही भीषण ठंड मे गरीब असहाय लोगो को कम्बल प्रदान करना मेरी पहली प्राथमिकता होगी। गरीब जरूरतमंद महिलाओं ने कंबल पाकर के प्रसन्न नजर आई चंदा  नूरजहां  नानकी  प्रेमा  आदि तमाम महिलाओं ने उन्होंने विधायक के इस कार्य को सराहना किया दीपक सिंह चौहान विक्रम सिंह भदौरिया रंजित सिंह अरुण शुक्ला शैलेन्द्र सिंह बबलू चंदेल आदि उपस्थित रहे।
कस्बे मे कम्बल बाटते विधायक

Saturday, July 7, 2018

सेवानिवृत फ़ौज़ी के बेटे ने लगाई फाँसी।


शोक में रोते बिलखते परिजन।
फतेहपुर। सदर कोतवाली क्षेत्र के श्याम नगर खंभापुर में शुक्रवार रात सेवानिवृत्त फौजी के बेटे अनिल उर्फ संतू ने घर के स्टोर रूम में फांसी लगा ली। शव रस्सी के फंदे से लटका मिला। परिजनों को सुबह जानकारी हो पाई। घटना से परिवार में कोहराम मचा है। फिलहाल परिजन घटना की वजह नहीं समझ पा रहे हैं।सेवानिवृत्त फौजी चंद्रभान श्रीवास्तव का बेटा अनिल कुमार उर्फ संतू (40) बेरोजगार थे। बड़ा भाई संतोष श्रीवास्तव बिंदकी डाकघर में पोस्टमास्टर हैं। छोटा बबलू श्रीवास्तव व्यवसाय करता है। तीनों भाइयों का संयुक्त परिवार है। संतू की पत्नी नीलम है। बेटी रिया कक्षा 11वीं व बेटा कार्तिक कक्षा नौ का छात्र है। पड़ोसियों की मानें तो पिता और तीनों भाइयों में काफी प्रेम था। शुक्रवार शाम मोहल्ले की बिजली खराब थी। संतू मोहल्लेवासियों के साथ उपकेंद्र लाइन ठीक कराने के लिए गया था और रात करीब साढ़े 11 बजे लौटा था। इसके बाद रात लगभग एक बजे तक उसने टीवी पर मैच देखा था। बच्चे सो गए थे, बाद में पत्नी भी सो गई। सुबह बच्चों को स्कूल भेजने के लिए पत्नी नाश्ता तैयार करने लगी। नाश्ता करने के बाद बच्चे स्कूल जाने की जानकारी देने के लिए पिता को खोजने लगे। अपने कमरे में पिता को न देख घर के बाहर देखा, लेकिन उनका पता नहीं चला। कुछ देर बाद पत्नी स्टोर से कुछ समान निकालने गई तो पति का शव छत पर लगे छल्ले में रस्सी के फंदे में लटका था। पति की हालत देख वह चीख पड़ी। चीख सुनकर परिवार के अन्य सदस्य भागते हुए स्टोर पहुंचे और वहां के हालात देखकर  सन्न रह गए।  परिवार में कोहराम मच गया। देखते ही देखते दरवाजे पर भीड़ एकत्र हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने छानबीन करने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया है। बड़े भाई ने बताया कि भाई को किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं थी। उसने आत्महत्या क्यों की, यह बात कुछ समझ में नहीं आ रही है। कोतवाल शैलेद्र सिंह का कहना है कि परिजनों की सूचना पर शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। 
           नयी सोच। आलोक गौड