Wednesday, December 19, 2018

गीता के श्रवण मनन चितंन से आती है जीवन मे श्रेष्ठता

मौहार गाव मे गीता जयंती पर प्रवचन सुनते लोग

फतेहपुर(नई सोच)मलवा विकास खण्ड के मौहार गाव मे चल रहे गीता जयंती समारोह का प्रवचन के बाद दुसरे दिन समापन हुआ।संत स्वात्मानन्द जी महाराज ने गीता के श्लोकों की व्याख्या कर कलयुग में उसके महत्व व प्रभाव पर चर्चा की। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ यह संवाद ही श्रीमद् गीता है। उपदेश के दौरान ही भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपना विराट रूप दिखलाकर जीवन की वास्तविकता से उनका साक्षात्कार कराया।तब से अब तक गीता के इस उपदेश की सार्थकता बनी हुई है।संत महाराज ने श्रीमद गीता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से हमारी लुप्त हो रही संस्कृति को बचाया जा सकता है।उन्होने पांच बिदुओं में पूरे गीता का सार बताया। पहला श्रीमद्भागवत गीता हिदुओं का पवित्र ग्रंथ है।दूसरा यह विश्व का इकलौता ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है।तीसरा गीता मनुष्य का परिचय जीवन की वास्तविकता से कराकर बिना स्वार्थ कर्म करने के लिए प्रेरित करती है। चौथा श्रीमद गीता अज्ञान,दुख,मोह, क्रोध,काम और लोभ जैसी सांसारिक चीजों से मुक्ति का मार्ग बताती है,और पांचवा गीता के अध्ययन, श्रवण, मनन-चितंन से जीवन में श्रेष्ठता का भाव आता है।प्रवचन सुनने को काफी सख्या मे भक्त एकत्रित हुये।प्रमुख रूप से राम सिंह कछवाह प्रताप सिंह सुरेन्द्र सिंह बबलू सिंह रहे।
आलोक गौड़

No comments:

Post a Comment