Tuesday, January 15, 2019

चाद्पुर की रामलीला मे मेधवियो को किया गया सम्मानित

●श्रीराम ने तोड़ा धनुष, सीता ने पहनाई वरमाला
●सीता स्वयंवर और परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने मोहा दर्शकों का मन
●चाद्पुर में चल रही रामलीला मंचन का का हुआ समापन

आलोक गौड फतेहपुर
फतेहपुर(नई सोच)।अमौली विकास खण्ड के चाद्पुर गाव मे चल रही रामलीला के तीसरा दिन सोमवार रात को पुष्पवाटिका में राम-सीता मिलन, सीता स्वयंवर एवं लक्ष्मण-परशुराम संवाद प्रसंग का मंचन किया गया। जनकपुर के राजदरबार में सीता स्वयंवर के लिए आए राजाओं का शिव धनुुष तोड़ने का बार-बार असफल प्रयास और परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने दर्शकों को रोमांचित कर तालियां बजाने को मजबूर कर दिया।कानपुर,बादा,हमीरपुर,फतेहपुर के कलाकारों ने अपने अभिनय से इसे और जीवंत बना दिया।तीसरे दिन के मंचन की शुरुआत दोनों राजकुमारों संग ऋषि विश्वामित्र जनकपुर पहुंचने से होती है।राजा जनक उनका स्वागत करते हैं।राम-लक्ष्मण गुरू की आज्ञा पाकर जनकपुर घूमने निकलते हैं। पुष्पवाटिका में उनकी मुलाकात सीता से होती है।अगले दृश्य में सीता स्वयंवर के दौरान राज दरबार में देश-विदेश के राजा मौजूद हैं,लेकिन कोई भी शिव धनुष को हिला तक नहीं पाता। इसी दौरान हुए रावण व बाणासुर संवाद भी दर्शकों को खूब भाया।राजा जनक कहते हैं कि लज्जा करो-लज्जा करो, ये पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है। इसके बाद गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष को तोड़ देते हैं और मंगल गीतों के बीच हर्षित सीता उनके गले में वरमाला डालती हैं।धनुष खंडित होने की गूंज से क्रोधित परशुराम सभा में पहुंचते हैं और धनुष तोड़ने वाले का नाम पूछते हैं।इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम की गर्मा गर्म बहस होती है। इस दृश्य को महिलाओं और बच्चों ने खूब पसंद किया।धनुष के टूटते ही क्रोध में भरे परशुराम आते हैं और जब पूछते हैं कि धनुष तोड़ने का दुस्साहस किसने किया तो लक्ष्मण भी क्रोध में भर जाते हैं और दोनों के बीच संवाद होते हैं जिसका सभी ने आनंद लिया।रामलीला पंडाल जय जय श्री राम के उद्घघोष से गूज उठा।


मेधावीयो का हुआ सम्मान

चाद्पुर की रामलीला मे सालो से  चल रही गाव के मेधावीयो को सम्मानित करने का क्रम चल रहा है।गाव के चयनित हाईस्कूल व इंटरमीडियेट के मेधावियो को रामलीला कमेटी द्वारा सम्मानित किया गया।समाजसेवी अभी तिवारी,धर्मेंद्र सिंह,सागर सिंह,अशोक दिवेदी,रमेश,उमेश पांडेय और समस्त रामलीला कमेटी के लोग आदि रहे।

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