Tuesday, March 5, 2019

पथरीगढ़ की लड़ाई का वीरता पूर्वक गायन कर श्रोताओं में भरा जोश

आल्हा सुना श्रोताओं में भरा जोश

पहुर गाव के झारखण्डेश्वर मन्दिर मे लगा मेला


आलोक गौड/नई सोच
फतेहपुर।मलवा विकासखंड के पहुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर झारखंडेश्वर धाम में महाशिवरात्रि से शुरू हुए दो दिवसीय मेले का समापन हो गया।नेहा ऐंड पार्टी रायबरेली की टीम ने मंगलवार को मेले में आल्हा सम्राट लल्लू बाजपेई के शिष्यों द्वारा आल्हा गायन प्रस्तुत किया गया।जिसमे पथरीगढ़ की लड़ाई,बेला का विवाह,माड़ो की लड़ाई,उदल का विवाह आदि
प्रसंगों का वीरता पूर्वक गायन कर श्रोताओ मे जोश भर दिया।आल्हा-गायन में संगति वाद्य ढोलक, झांझ,मंजीरा आदि से वीर रस से ओतप्रोत दृश्य ने श्रोताओ को अपनी ओर खीचा।कानपुर के धर्मेंद्र यादव, सानू देवी फर्रुखाबाद,सूर्यभान फतेहपुर का आल्हा गायन लोगो ने सुना।आल्हा आयोजक इंद्रपाल सिंह गौतम ने कहा बुंदेलखंड में आल्हा गायन का अलग ही महत्व है।पहले चौपालों में यहां सावन आते ही आल्हा गायन शुरू हो जाता था।इस दौरान गांवो की चौपालों में वीरता उनके वीरता के किस्से सुनाई पड़ते थे। चौपालें सज उठती थी।लेकिन अब चौपालों में आल्हा की गूंज सुनाई नहीं देती।केवल इतना ही नहीं गांव-गांव हाथियों पर सवार होकर सुंदर झांकियां निकाली जाती थी। इस हाईटेक युग में आल्हा गायन का क्रेज कम हो गया है।आल्हा सुनने को जलाला,रामपुर,अलीपुर,हरदौलपुर,चौडगरा,साई सहित तमाम गांव के लोग एकत्रित रहे आल्हा गायन सुनकर के लोग जरूरत का सामान भी खरीदा।मेले में बच्चों ने चाट चाउमीन बर्गर का लुफ्त उठाया तो वहीं मेले में पहुंची महिलाओं ने घर गृहस्ती का सामान खरीदा।आने वाले श्रद्धालु भक्तों ने झारखंडेश्वर शिव मंदिर में पूजा अर्चना कर दर्शन किया।इस मौके पर मेला मालिक इंद्रपाल सिंह गौतम,प्रधान गणेस दीक्षित,लल्ला सिंह,रामबहादुर सिंह,सूरज पाल सिंह,बच्चा सिंह,ओम सिंह,रिषभ सिंह,सौरभ,हर्ष आदि रहे ।

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