Sunday, March 3, 2019

हजारो भक्तो कि आस्था का केन्द्र है जलाला का बारादुआरी शिवमन्दिर

आलोक गौड/नई सोच फतेहपुर
बारादुआरी शिव मन्दिर की शिवलिंग-नई सोच आलोक गौड

आलोक गौड फतेहपुर
चौडगरा(फतेहपुर)।मलवॉ विकास खंड के जलाला गॉव के पास खजुहा रास्ते मे बारादुआरी शिवमन्दिर हजारो भक्तो कि आस्था का प्रमुख केन्द्र जहॉ भक्त अपनी मुराद पूरी होने पर चढावा चढाते है।महाशिवरात्रि मे यहॉ विशेष पूजा रूद्राभिसेक आदि कार्यक्रम होते है।भक्त दूर दराज से पहुँचकर भगवान शिव को जल चढाते है।पवित्र नदी गंगा का जल लाकर कावडिया भी यहॉ पहुँचते है और बम बम भोले के साथ जल चढाते है।
*निर्मल मन से कि गयी भक्ति से मिलता है फल*
आचार्य पण्डित राजेश अवस्थी ने बताया महाशिवरात्रि शिव भक्ति का दिन है सारे अवगुण त्याग कर सच्चे मन से आराधना करनी चाहिये तभी भक्त कि मनोकामना पूरी होती है।भगवान भाव के भूखे है और उनमे शिव भगवान को बेलपत्र धतूरा पंसद है शिव भगवान जल चढाने पर ही प्रसन्न होते है और भक्त कि इच्छाओ कि पूर्ति करते है।
*प्राचीन कुये का जल दिलाता है रोगो से मुक्ति*
बारादुआरी शिवमन्दिर मे प्राचीन कुआ है जिसमे बारहमास जल भरा रहता है, कहा जाता है कुये का जल मीठा है। निकलने वाले राहगीर यहॉ रूककर कुये के जल का पान करते है और इस जल को गंगा जल कि तरह बोतलो मे भरकर ले जाते है।कहा जाता है कुये के जल से रोगो से मुक्ति मिलती है।त्वचा रोगो मे इस कुये का जल प्रभाव डालता है और नियमित सेवन से रोगी स्वस्थ हो जाता है।

*मनोकामना पूरी होने पर होते है कार्यक्रम*
मन्दिर मे अक्सर भण्डारा रामायण भजन आदि होते रहते है किसी भी भक्त कि मनोकामना जब पूरी हो जाती है तो भक्त यहॉ राहगीरो को प्रसाद बाटते है शिव भगवान पर चढावा चढाते है।भक्त यहॉ मुण्डन संस्कार,छेदन संस्कार भी कराते है।
*जंगल से मन गया रमणीक स्थल*
बरसो पहले यहॉ घना जंगल था लोग यहॉ से निकलने मे डरते थे तब घूमते घूमते संतो का डेरा यहॉ रुका और साफ़ सफ़ाई कि कुछ ही समय मे जंगल मे कुटी बन गयी और लोगो का आना जाना शुरू हो गया भक्तो ने यहॉ मन्दिर बनवा दिया।मन्दिर मे एक तरफ़ संत विष्णु दत्त उर्फ कल्लू बाबा का आश्रम है आने वाले भक्त संत श्री के दर्शन करके ही जाते है।

*बारादुआरी मे है बूढ़ा बेर का विशाल वृक्ष*
मन्दिर कि सुदंरता पेड़ पौधो से है इस मंदिर मे सैकडो फूल के पौधे है आम,अमरूद,जामुन,कटहल के बड़े वृक्ष के साथ मन्दिर के बाहर बैर का विशाल वृक्ष है जिसे देखकर भक्त अनायास ही खिचे चले आते है और अपना समय वृक्ष कि सुंगधित वायु के बीच बैठकर बिताते है वृक्ष कि भी पूजा कि जाते है भक्त कहते है शिव भगवान को बेर पंसद है।
*बच्चो ने सम्भाल रखी है मन्दिर के साफ़ सफ़ाई कि व्यावस्था*
जलाला,अलीपुर गॉव के बच्चे सुबह पहुँचकर मन्दिर कि साफ़ सफ़ाई करते है गॉव के सुधीर,हर्ष गुप्ता,रीसू सैनी मुकेश,अभय सैनी मन्दिर कि साफ़ सफ़ाई कर वहॉ सुगंधित फूल तथा तुलसी कि क्यारी बना पौधे रोपित कर रखे है जो मन्दिर कि सुदंरता को बढाये है।

*आस्थावान रामजानकी पवनसुत के करते है दर्शन*
हवन पूजन के लिए बने कुण्ड के समीप रामजानकी पवनसुत हनुमान कि प्रतिमाये स्थापित है आने वाले भक्त यहॉ पूजा अर्चना करते है।यह मूर्तिया आकर्षण का केद्र है।
*कैसे पहुँचे बारादुआरी मन्दिर*
मन्दिर पहुँचने के लिए जिला मुख्यालय से चौडगरा चौराहे से बकेवर रोड एनएच 46मे पहुर गॉव से खजुहा रोड है एक किलोमीटर मे जलाला गॉव के बाहर मन्दिर है।
रेल द्वारा पहुँचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन बिन्दकी रोड है।

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